भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां की डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ दिनेश कुमारी ने कहा कि जीवन विकास का मुख्य आधार शिक्षा है और शिक्षा की मुख्य आधारशिला पुस्तकालय होते हैं। विकसित पुस्तकालय ही शिक्षा को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। एआई क्रांति ने पुस्तकालयों को भी प्रभावित किया है। ऐसे में एआई का प्रयोग करते हुए पुस्तकालयों को उन्नत बनाया जा सकता है।
वे शुक्रवार को दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में ‘स्मार्ट लाइब्रेरी : पुस्तकालय संचालन में एआई का एकीकरण’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बतौर एक्सपर्ट बोल रही थी। कार्यशाला की कन्वीनर डॉ सीमा व कॉर्डिनेटर डॉ रेणु ने डीएलसीसुपवा पहुंचने पर डॉ दिनेश कुमारी का स्वागत किया। कार्यशाला में सुपवा की दोनों लाइब्रेरी का स्टाफ मौजूद रहा। डॉ दिनेश कुमारी ने कहा कि एआई एल्गोरिदम प्रासंगिक पुस्तकों, लेखों व संसाधनों का विश्लेषण कर उन्हें अधिक पठनीय बनाता है। वर्चुअल असिस्टेंट और चैटबॉट सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर प्रदान करते हैं, लाइब्रेरी कैटलॉग को नेविगेट करने में सहायता करते हैं, वास्तविक समय भाषा अनुवाद करते हैं। टेक्स्ट-टू-स्पीच व स्पीच-टू-टेक्स्ट जैसे एआई टूल लाइब्रेरी संसाधनों को दिव्यांगजनों के लिए अधिक सुलभ बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि एआई के आने से लाइब्रेरियन की भूमिका बदल रही है। वे अब क्यूरेटर से सूचना आर्किटेक्ट्स बन रहे हैं। वे जटिल सूचना परिदृश्य के माध्यम से उपयोगकर्ताओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। विशेष संग्रह क्यूरेट कर रहे हैं और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पुस्तकालयों को एआई टूल और गाइड संरक्षक का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए डेटा विश्लेषण, एआई साक्षरता, नैतिक एआई तैनाती और उपयोगकर्ता शिक्षा में कौशल विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एआई लेनदेन संबंधी प्रश्नों को संभालने के साथ, लाइब्रेरी स्टाफ को व्यक्तिगत परामर्श, जटिल अनुसंधान सहायता व पुस्तकालय के भीतर समुदाय की भावना को बढ़ावा देने के लिए अधिक समय देना चाहिए।
डॉ दिनेश कुमारी ने कहा कि एआई से डेटा गोपनीयता व सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ जाती हैं। पुस्तकालयों को मजबूत नीतियों, पारदर्शी डेटा उपयोग प्रथाओं व उपयोगकर्ताओं से सूचित सहमति की आवश्यकता है। पुस्तकालयों को एआई संवर्धित सेवाओं के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। पुस्तकालयों को सूचना सत्यापन व जिम्मेदार सामग्री साझा करने के लिए अपनी रणनीतियों को अनुकूलित करना होगा। उन्होंने कहा कि एआई पुस्तकालयों या लाइब्रेरियन की जगह नहीं ले रहा है, बल्कि उन्हें अपनी पहुंच का विस्तार करने, अपनी सेवाओं को बढ़ाने व तेजी से डिजिटल दुनिया में अपरिहार्य संसाधनों को बनाए रखने के लिए सशक्त बना रहा है।


