झज्जर जिले के मुनिमपुर गांव में हुआ दर्दनाक कुआं हादसा चार परिवारों की जिंदगी उजाड़ गया। जिस कुएं में पहले एक बछड़े को बचाने की कोशिश हो रही थी, वही कुछ ही मिनटों में चार लोगों के लिए मौत का गड्ढा बन गया। कुएं के भीतर जहरीली गैस भरी हुई थी। अंदर फंसे लोग मदद के लिए पुकार रहे थे, जबकि बाहर खड़े ग्रामीण, पुलिस और प्रशासन की टीमें बेबस नजर आ रही थीं। जहरीली गैस और पर्याप्त रेस्क्यू उपकरणों की कमी के कारण कोई भी नीचे उतरने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
इसी बीच झज्जर पुलिस के SIT इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बिना अपनी जान की परवाह किए रेस्क्यू की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने मास्क पहना, रस्सी के सहारे कुएं में उतर गए और जहरीली गैस के बीच एक-एक कर चारों लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
चारों को बाहर निकाला, लेकिन नहीं बच सकीं जानें
ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों की मदद से राजेश कुमार ने चारों ग्रामीणों को कुएं से बाहर निकाल लिया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। जहरीली गैस के कारण चारों की मौत हो चुकी थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान राजेश कुमार भी गैस की चपेट में आ गए। बाहर आते ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।
बहादुरी की हर तरफ हो रही सराहना
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि राजेश कुमार भी पीछे हट जाते, तो चारों शवों को बाहर निकालना भी घंटों तक संभव नहीं हो पाता। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर पुलिस की वर्दी का फर्ज निभाया।
हादसे के बाद भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़, बादली के विधायक कुलदीप वत्स, पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और उनका हालचाल जाना। सभी ने उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
मुनिमपुर की इस त्रासदी ने चार परिवारों के चिराग बुझा दिए, लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बीच सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने यह साबित कर दिया कि सच्चा पुलिसकर्मी वही होता है, जो सबसे मुश्किल वक्त में सबसे पहले आगे बढ़कर दूसरों की जिंदगी बचाने की कोशिश करता है।

