मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तारकोल (बिटुमेन) की कमी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अगले छह महीने तक इंपोर्टेड तारकोल के उपयोग को मंजूरी दे दी है, ताकि राज्य में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित न हों।
शनिवार को सिविल सचिवालय में सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े विभागों की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि 28 फरवरी को तारकोल की कीमत 46,402 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी, जो 1 अप्रैल तक बढ़कर 76,152 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई है।
इसके साथ ही आपूर्ति पर भी असर पड़ा है और उपलब्धता में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है, जिससे सड़क परियोजनाओं पर दबाव बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों के अनुरोध पर अगले छह महीनों के लिए इंपोर्टेड तारकोल के उपयोग को मंजूरी दी है, ताकि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य बिना रुकावट जारी रह सकें।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में पैच वर्क मशीनों का अधिक उपयोग किया जाए, जिससे टूटी सड़कों की मरम्मत तेजी से हो सके। साथ ही अन्य विभागों को भी आवश्यकता पड़ने पर पीडब्ल्यूडी से मशीनें लेने की अनुमति दी गई है, ताकि काम में तेजी लाई जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि खराब सड़कों के कारण आम जनता को होने वाली परेशानी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और मरम्मत कार्य समय पर पूरा करना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शहरी क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कों की तुरंत मरम्मत के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि हर सड़क की जिम्मेदारी किस विभाग की है, यह स्पष्ट रूप से तय किया जाए, ताकि काम में देरी न हो। साथ ही कुछ शहरों में स्मार्ट रोड विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण तारकोल (बिटुमेन) की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी के बावजूद सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार ने अगले छह महीनों तक इंपोर्टेड तारकोल के उपयोग को मंजूरी दी है।
इसके साथ ही सड़कों की मरम्मत, गड्ढों को भरने और लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर सड़क सुविधाएं मिल सकें।

