रोहतक के आईएमटी स्थित फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में मरने वाले मजदूर यहां कमाई के उद्देश्य से आए थे, लेकिन दोनों मजदूरों को यहां कफन नसीब हुआ। परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर भी अपने परिवार की भलाई की सोच रखते हुए मेहनत करने में जुटे थे। उन्हें क्या पता था कि वे इस बार घर वापस ही नहीं लौट पाएंगे, बल्कि उनके शव ही घर पहुंचेंगे। आईएमटी स्थित फैक्ट्री में सोमवार को फर्नेस मशीन पर काम करते समय ब्लास्ट हो गया था। जिस कारण फैक्ट्री में काम कर रहे उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद निवासी रमेश, सोहनभद्र निवासी बिजेंद्र व गोरखपुर निवासी सच्चिदानंद बुरी तरह से झुलस गए। तीनों को उपचार के लिए रोहतक पीजीआई में लाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने रमेश व बिजेंद्र को मृत घोषित कर दिया। वहीं सच्चिदानंद घायल हो गया और उसका उपचार जारी है।
मृतक रमेश अपने घर से करीब 900 से भी अधिक किलोमीटर दूर आकर यहां फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा था। मेहनत मजदूरी करने के लिए करीब दो माह पहले घर से आया था और तभी यहां फैक्ट्री में काम कर रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया है।

मृतक बिजेंद्र अपने घर से करीब 12 दिन पहले मजदूरी करने के लिए रोहतक आया था। पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार का सहारा बनने के उद्देश्य से वह मजदूर कर रहा था। घर से करीब 1050 से अधिक किलोमीटर मजदूरी करने के लिए आए बिजेंद्र की इस हादसे ने जान लील ली।

