हरियाणा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ फसल खराब हो चुकी है। किसान सरकार के स्पेशल गिरदावरी के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने विवादित बयान दिया।

करनाल और अंबाला के दौरे पर कृषि मंत्री ने कहा कि इस बारिश से फसल को नुकसान नहीं होता, बल्कि फायदा होता है और पैदावार प्रति एक दो क्विंटल तक बढ़ सकती है। उनके इस बयान के बाद किसान नेता और विपक्षी पार्टी के नेता उनका विरोध कर रहे हैं। विपक्ष लगातार बेमौसमी बारिश के कारण हुए नुकसान की स्पेशल गिरदावरी की मांग कर रहा है

इससे पहले सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने भी कहा था कि इस बार बारिश अच्छी हुई, इंद्रदेव हमारे पर प्रसन्न हैं। हरियाणा में मार्च में 16% अधिक बारिश हुई है और ओलावृष्टि से करीब 361 गांवों में फसल खराब हुई है। हालांकि, सरकार ने अभी तक स्पेशल गिरदावरी के आदेश नहीं जारी किए हैं।

भिवानी के तोशाम में 31 मार्च को हुई रैली में सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने इसी तरह का बयान दिया था। उन्होंने कहा, “प्रदेश के सीएम नायब सिंह सैनी जब भी यहां आते हैं, मैं देखती हूं कि इंद्रदेव हमेशा खुश रहते हैं और हमेशा पानी बरसता है। इस बार भी हमारे ऊपर कृपा हुई है।”

इस पर कांग्रेस के नारनौंद से विधायक जस्सी पेटवाड़ ने तीखा निशाना साधा और कहा, “इस बारिश ने किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद कर दी, लेकिन मंत्री और सीएम को इसमें भी खुशी नजर आ रही है। जमीन की हकीकत से इतनी दूरी क्यों?”

राजस्व विभाग और जिला प्रशासन ने 31 मार्च को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति का सर्वे किया। सर्वे के अनुसार प्रदेश के 8 जिलों के 361 गांवों में फसलें 5% से लेकर 100% तक खराब हुई हैं।

सबसे अधिक नुकसान गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलों को हुआ है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति झेलनी पड़ रही है। 4 मार्च को नरवाना और आसपास के कुछ क्षेत्रों में ओले गिरे थे। मौसम विभाग ने 7 और 8 अप्रैल को भी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि फसल नुकसान का सटीक आंकलन कैसे किया जाएगा।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गेहूं विशेषज्ञ और सीनियर साइंटिस्ट डॉ. ओपी बिश्नोई ने कृषि मंत्री से अलग राय दी है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च को हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचा है।

डॉ. बिश्नोई के अनुसार, तापमान में आई गिरावट का लाभ केवल देर से बोए गए गेहूं को होगा। जिन किसानों ने दिसंबर में गेहूं की बुवाई की है, उन्हें ही इस बारिश से कुछ फायदा मिलेगा। वहीं, पहले बोई गई फसल को नुकसान होगा। भविष्य में अगर और बारिश होती है, तो गेहूं को और नुकसान पहुंच सकता है।

मंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ा विरोध जताया। यूजर कविता धनखड़ ने लिखा, “बरसात से फसल को लाभ बताने वाले मंत्री जी, एक दिन मंडी में भीगी हुई फसल के ढेर के पास बैठिए। शाम तक ‘कृषि’ और ‘कुर्सी’ का फर्क समझ में आ जाएगा!”

वहीं प्रीति नाम की यूजर ने लिखा कि मंत्री जी यह भूल गए कि ओले पड़ने से गेहूं की पैदावार बढ़ती है क्योंकि मौसम ठंडा हो जाता है।

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