नेपाल में बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में बनी दो झीलों पर नेपाल की नजर है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी के अनुसार, जब तक दोनों झीलों का पानी पूरी तरह निकल नहीं जाता, तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
इनमें से एक झील शुक्रवार को ओवरफ्लो होने लगी, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। उसके पानी के बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता अभी दिखाई नहीं दे रहा है।
रॉयटर्स के अनुसार, उपग्रह से मिली तस्वीरों में दोनों झीलें उस स्थान के पास दिखाई दी हैं, जहां बुधवार को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद चट्टान, बर्फ, मिट्टी और मलबा नदी तंत्र में जा गिरा था। इससे अचानक आई बाढ़ की लहरों ने घरों को तबाह कर दिया और पुल बह गए। गुरुवार को चीनी बचाव दल ने हवाई सर्वे के दौरान एक झील के बनने के दृश्य भी रिकॉर्ड किए थे।
उस समय बड़ी मात्रा में भूरा पानी एक बेसिन में जमा होता दिखाई दे रहा था। शुक्रवार को मिली नई उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, पहली झील का पानी अब बाहर निकलने लगा है। हालांकि, इसी क्षेत्र में ऊपर की ओर दूसरी झील भी दिखाई दी है, जिसका सतही क्षेत्र पहली झील से बड़ा है।
शुक्रवार सुबह तक इसमें पानी के बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखा। इससे आशंका है कि दूसरी झील में पानी का दबाव अभी बढ़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों झीलों के पूरी तरह खाली होने तक निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
एएनआई के अनुसार, नेपाल के अधिकारियों ने खतरे की निगरानी के लिए सीमावर्ती शहर तिमुरे और नदी के बहाव की दिशा में नीचे की ओर कैमरे और सेंसर लगाने की योजना बनाई है। इन्हें हेलीकाप्टर की मदद से लगाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। नेपाल सेना के प्रवक्ता राजा राम बासनेट के अनुसार, भोटेकोशी नदी का जलस्तर करीब दो फीट बढ़ने के बाद राहत और बचाव अभियान को लगभग तीन घंटे के लिए रोकना पड़ा।
बाद में अभियान फिर शुरू कर दिया गया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने राहत और बचाव में जुटे लोगों को हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी है।मौत और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतरबुधवार की आपदा में नेपाल में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। पीटीआई के अनुसार, उपलब्ध सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर बना हुआ है।
नेपाल सरकार के अनुसार, 622 लोग लापता हैं, जबकि 121 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। दूसरी ओर, नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक आठ जिलों से 579 शव बरामद किए गए हैं। इनमें चितवन से 221, नवलपरासी ईस्ट से 134, गोरखा से 46, नुवाकोट से 37, धादिंग से 33, तानु से 28, नवलपरासी वेस्ट से 27 और रसुवा से 12 शव शामिल हैं।
रेडक्रॉस के अनुसार, बाढ़ और उससे जुड़ी आपदा से करीब 90 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए जमीनी और हवाई अभियान जारी है। बचाव अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं, जिनमें 2,391 नेपाल सेना के जवान शामिल हैं। कई देशों ने मदद की पेशकश की है, हालांकि नेपाल फिलहाल अपने संसाधनों से अभियान चला रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह समेत मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने आपदा राहत कोष में अपनी एक महीने की तनख्वाह देने का फैसला किया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, तिब्बती क्षेत्र में फंसे करीब 400 भारतीयों से संपर्क स्थापित हो चुका है और वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। शुक्रवार शाम तक इनमें से 153 भारतीय सड़क मार्ग से सुरक्षित नेपाल पहुंच गए। उन्हें भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है।नेपाल में अभी भी 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
इसके अलावा करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी लापता हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ऐसे यात्री शामिल हैं जिनकी नागरिकता दूसरे देशों की है।
बुधवार की आपदा के बाद काठमांडू पहुंचे तमिलनाडु के 21 यात्रियों को शुक्रवार को दिल्ली लाया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया।
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग काउंटी में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने संवेदना जताई है और अधिकारियों को प्रभावी तथा वैज्ञानिक तरीके से राहत एवं बचाव अभियान चलाने का निर्देश दिया है। चीन ने नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आपात सहायता उपलब्ध कराने की भी पेशकश की है।

