चंडीगढ़। हरियाणा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS और BDS दाखिले को लेकर नए नियम जारी किए गए हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद सीट छोड़ने वाले विद्यार्थी को ₹10 लाख की राशि चुकानी पड़ सकती है और अगले तीन साल तक दोबारा प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया अधिसूचित की है।

निजी कॉलेज में सीट छोड़ना भी पड़ेगा महंगा
निजी मेडिकल या डेंटल संस्थान में बीच में कोर्स छोड़ने वाले विद्यार्थी को संबंधित शैक्षणिक सत्र की फीस के साथ अगले शैक्षणिक सत्र की 50 प्रतिशत फीस भी देनी होगी। यह नियम मैनेजमेंट कैटेगरी के विद्यार्थियों पर भी लागू होगा।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 प्रतिशत सीटें NEET-UG की ऑल इंडिया मेरिट और शेष 85 प्रतिशत सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटेगरी के आधार पर भरी जाएंगी।

निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटा और 50 प्रतिशत मैनेजमेंट कैटेगरी के लिए निर्धारित की गई हैं। मैनेजमेंट कैटेगरी में से 15 प्रतिशत NRI कोटा होगा।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए बॉन्ड भी निर्धारित
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए पुरुष अभ्यर्थियों के लिए ₹25,77,090 और महिला अभ्यर्थियों के लिए ₹23,19,381 की बॉन्ड राशि निर्धारित की गई है। सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में यह राशि पुरुषों के लिए ₹21.90 लाख और महिलाओं के लिए ₹19.71 लाख रखी गई है।

वहीं निजी मेडिकल कॉलेज विद्यार्थियों से पूरे कोर्स की ट्यूशन फीस एकमुश्त एडवांस में जमा नहीं करा सकेंगे।

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