नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ के मुश्किल समय में मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है। भारत के साथ-साथ चीन को भी शाह ने धन्यवाद दिया है। नेपाल में बीते महीने के आखिरी में आई बाढ़ से भारी तबाही मची है, जिसके बाद पड़ोसी देशों ने नेपाल की दिल खोलकर मदद की है। बाढ़ के बाद कई स्तरों पर जिन देशों ने नेपाल की बढ़-चढ़कर मदद की, उसमें चीन और भारत का नाम सबसे प्रमुख है।
बुधवार को नेपाल की संसद में बोलते हुए पीएम बालेन शाह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के समय अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता था। नेपाल ने समय पर मदद पाने के लिए निजी क्षेत्र में दूसरे देशों के साथ तालमेल बिठाया। भारत और चीन ने हमें मदद रहते मदद पहुंचाई, जिससे बहुत चीजें समय रहते संभव हो सकीं।
नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा, ‘हमारे मित्र देशों, चीन और भारत ने टेक्नीशियन भेजे थे। पहले ही दिन से उन्होंने इलाके में हुए नुकसान का अंदाजा लगाने और यह पता लगाने के लिए हमारी मदद की कि क्या उस जगह तक पहुंचना मुमकिन है। इव देशों ने हवाई सर्वे समेत कई तरह की जांच-पड़ताल की।’
शाह ने आगे कहा, ‘भारतीय टेक्नीशियन जितनी जल्दी हो सका, दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच पाए। यह एक असाधारण स्थिति थी
26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की ओर से मदद की जा रही जहै। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को बताया कि नेपाल के लिए भारत का पांचवां राहत विमान रवाना हुआ है। यह विमान 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष बचाव उपकरणों और 5.5 टन जरूरी दवाइयों के साथ नेपाल भेजा गया है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद से लगातार बचाव अभियान जारी है और लगातार शव मिल रहे हैं। नेपाल पुलिस ने कहा है कि मंगलवार शाम तक 1,127 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर लापता लोगों की संख्या अभी भी 4,858 है। ऐसे में अंदेशा है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।
नेपाली अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान जारी है। कई लोग अभी भी जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में फंसे हो सकते हैं। वहीं अज्ञात शवों को रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है। अब तक बरामद किए गए शवों में से केवल कुछ की ही पहचान हो पाई है। अज्ञात शवों की डीएनए के जरिए पहचान की जाएगी।

