हरियाणा में सरकार और नए चुने सरपंचों के बीच ई-टेंडरिंग का विवाद बढ़ गया है। इस वजह से CM मनोहर लाल की करनाल में होने वाली संयुक्त मंत्रणा का कार्यक्रम अचानक रद्द करना पड़ा। यहां 14 जनवरी यानी आज ही यह कार्यक्रम था। करनाल के मंगलसेन ऑडिटोरियम में होने वाले इस कार्यक्रम में सीएम ने सरपंचों, पंचायत समिति सदस्यों व जिला परिषद के सदस्यों के साथ मंत्रणा करनी थी। जिसके लिए CM खास तौर पर करनाल आए थे।

हालांकि किरकिरी से बचने के लिए सरकार अब इस कार्यक्रम के रद होने को मकर संक्रांति के त्योहार से जोड़ रही है। जिसका एक पत्र भी सामने आया है। वहीं सवाल यह उठ रहे हैं कि इसके बारे में तो अधिकारियों को पहले से पता था कि त्योहार है, फिर भी कार्यक्रम रखा गया तो जानबूझकर बहाना बनाया जा रहा है।

सरकार की तरफ से सरंपचों के CM को पत्र भेजने का दावा किया गया है। जिसमें लिखा गया है कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार है। सभी सरपंचों को अपने-अपने गांवों में लोगों के साथ मिलकर यह त्योहार मनाना है। इसलिए सभी सरपंच अनुरोध करते है कि 14 जनवरी को मंगलसेन ऑडिटोरियम में होने वाले कार्यक्रम को रद्द किया जाए और किसी अन्य तारीख में यह कार्यक्रम किया जाए।

मुख्यमंत्री को लिखे इस पत्र में करीब 20 से 25 सरपंचों के हस्ताक्षर है। जिन्होंने मकर संक्रांति के त्योहार का हवाला देकर यह कार्यक्रम रद्द करने की मांग की है। हरियाणा में 6 हजार से ज्यादा सरपंच हैं। ऐसे में कार्यक्रम रद्द होने के पीछे त्योहार की वजह लोगों को हजम नहीं हो रही। वहीं स्थानीय नेताओं को भी इसका पहले से पता था, फिर भी कार्यक्रम रद्द होने के पीछे विवाद को वजह माना जा रहा है।

चर्चा यह भी है कि सरकार को सरपंचों के ई-टेंडरिंग को लेकर विरोध का डर सता रहा है। करनाल में भी सरपंच प्रदर्शन कर चुके है। ऐसे में CM ऑफिस के पास भी रिपोर्ट हो सकती है कि कहीं सरपंच मंत्रणा कार्यक्रम के दौरान ही कोई विरोध ना कर दें। कुछ दिन पहले पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के समारोह के दौरान भी सरपंचों ने विरोध जताया था। असल में सरकार ने तय किया है कि हर गांव में अब 2 लाख से ऊपर के कामों की ई-टेंडरिंग होगी। इसका सरपंच विरोध कर रहे हैं कि वह अपने स्तर पर गली-नाली तक नहीं बना सकते। गांव का विकास धीमा होगा।

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