चंडीगढ़/मुंबई: हरियाणा में पिछले दिनों कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखाओं पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अदालत के सामने आए तथ्यों के अनुसार, पंचकूला नगर निगम के 145 करोड़ से अधिक के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाले के मामले में पुलिस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए राज्य में बैंक की सभी 109 शाखाओं को पूरी तरह सील (Lock) कर दिया था। इस अचानक और सख्त कार्रवाई की वजह से हरियाणा के करीब 14 लाख ग्राहक कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं के लिए तरस गए और राज्य में हड़कंप मच गया।
24,000 करोड़ की पूंजी हुई थी फ्रीज: बैंक की ओर से कोर्ट में दिग्गज वकीलों ने बताया कि हरियाणा की इन 109 शाखाओं में राज्य के आम नागरिकों और व्यापारियों के करीब 24,000 करोड़ जमा थे, जो इस कार्रवाई के कारण ब्लॉक हो गए थे।बिना किसी पूर्व नोटिस के शाखाएं बंद होने से आम खाताधारकों का दैनिक लेन-देन, व्यापारिक भुगतान और एटीएम सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं।बैंक ने अदालत को सूचित किया कि इस भारी संकट के बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव (अरुण गुप्ता) ने मामले में हस्तक्षेप किया।
शाखाओं की सील तभी खोली गई जब कोटक महिंद्रा बैंक ने पंचकूला नगर निगम के बचत खाते में ₹127.27 करोड़ की राशि जमा करा दी।
कोटक बैंक ने हाईकोर्ट में दलील दी कि इस घोटाले को लेकर खुद बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने उनके अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय बैंक की शाखाओं को ही ताला लगा दिया। कोटक महिंद्रा बैंक ने अदालत में स्पष्ट किया है कि नगर निगम के खाते में जमा कराई गई ₹127.27 करोड़ की राशि केवल लंबित मिलान (Reconciliation Process) और जांच पूरी होने तक अस्थायी और शर्तों के अधीन (Conditional) जमा की गई है।
यह पूरा मामला पंचकूला नगर निगम (Municipal Corporation Panchkula) के फंड्स में हुई बड़ी हेराफेरी से जुड़ा है। नगर निगम ने कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला सेक्टर-11 शाखा में करीब ₹145 करोड़ से ज्यादा की 16 एफडी (Fixed Deposits) कराई थीं। ब्याज मिलाकर इसकी मैच्योरिटी वैल्यू लगभग ₹158 करोड़ होनी थी।
जब नगर निगम ने अपने खातों का मिलान बैंक के आधिकारिक लेजर से किया, तो पता चला कि बैंक रिकॉर्ड में पैसा बेहद कम था और कई लिंक्ड अकाउंट्स का सरकारी फाइलों में जिक्र ही नहीं था। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नगर निगम के अधिकारियों को झांसे में रखने के लिए बैंक के हूबहू दिखने वाले फर्जी टर्म डिपॉजिट एडवाइस (Forged FD Receipts) तैयार कर सौंप दिए थे, जबकि असली पैसे को बैकएंड से गायब कर दिया गया
