हरियाणा के फतेहाबाद जिले से एक बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है। नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म (रेप) के एक गंभीर मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 2 लाख रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया है।

अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की कुल राशि में से 1 लाख रुपए पीड़ित बच्ची को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे, जबकि शेष 1 लाख रुपए सरकारी खजाने में जमा होंगे।

“पीड़िता का जीवन तबाह करने से पहले एक पल न सोचा”
मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे अमित गर्ग की कोर्ट ने आरोपी के कृत्य पर बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने मासूम और नाबालिग पीड़िता का जीवन तबाह करने से पहले एक पल के लिए भी नहीं सोचा। इस संवेदनशील मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल और सहायक जिला न्यायवादी नवदीप ने मजबूत पैरवी की और आरोपी को अंजाम तक पहुंचाया।

जून 2024 में दर्ज हुई थी लापता होने की शिकायत
जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल के अनुसार, मामला जून 2024 का है। 28 जून 2024 को पीड़िता के परिजनों ने थाना सदर फतेहाबाद में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी अचानक घर से लापता हो गई है। परिजनों ने आशंका जताई थी कि कोई युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) और 366 के तहत मामला दर्ज कर तलाश शुरू की थी।

राजस्थान से बरामद हुई थी नाबालिग, पॉक्सो एक्ट में हुआ था केस
पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए करीब एक महीने बाद, 31 जुलाई 2024 को नाबालिग बालिका को राजस्थान से सकुशल बरामद किया। जांच के दौरान इस पूरी वारदात में विक्रम उर्फ रोकी नाम के युवक की संलिप्तता पाई गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता के मेडिकल परीक्षण, अदालत में दर्ज बयानों और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले में बाद में आईपीसी की अन्य धाराएं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट भी जोड़ा गया था।

कोर्ट ने किस धारा में कितनी सुनाई सजा?
अदालत ने गवाहों के बयानों और पुख्ता भौतिक साक्ष्यों को सही मानते हुए आरोपी विक्रम उर्फ रोकी को विभिन्न धाराओं में दोषी पाया और निम्नलिखित सजाएं मुकर्रर कीं:

धारा 363 (आईपीसी): 7 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माना।

धारा 366 (आईपीसी): 10 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माना।

धारा 4(2) पॉक्सो एक्ट: 20 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माना।

धारा 6 पॉक्सो एक्ट: 20 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माना।

अदालत के आदेशानुसार ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, जिसके तहत दोषी को अधिकतम 20 साल जेल में बिताने होंगे। कोर्ट के इस त्वरित और सख्त फैसले से कानून के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।

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