उज्जैन : महाकालेश्वर मंदिर के ऊपरी भाग में मौजूद नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन रही है. हालांकि, मंदिर प्रबंधन समिति ने इसका खंडन किया है. सावन सोमवार के साथ नागपंचमी पड़ने से यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है. वहीं, साल में केवल 1 दिन खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन की होड़ के चलते कुछ देर के लिए भगदड़ जैसे हालात बने, जिसमें कई लोगों की गर्मी और उमस के चलते तबीयत भी बिगड़ गई है. पिछले दो दिनों में (शनिवार 15 अगस्त व रविवार 16 अगस्त) को महाकाल मंदिर के आधिकारिक आंकड़े अनुसार करीब 14 लाख दर्शनार्थियों ने दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं. वहीं, आज नागपंचमी पर्व पर करीब 10 लाख और श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने का अनुमान है.

इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के बीच यह केवल भीड़ प्रबंधन नहीं, बल्कि उज्जैन के IAS – IPS और पूरे पुलिस महकमे एवं प्रशासनिक तंत्र की अग्निपरीक्षा लेनी शुरू कर दी है. नागचंद्रेश्वर मंदिर के बाहर श्रद्धलुओं की भीड़ के दबाव के कारण 13 श्रद्धालुओं की तबियत अचानक बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल मौके पर मौजूद पुलिस एवं प्रशासनिक टीम ने उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा जहां सभी का उपचार जारी है. वहीं, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने कहा, ” कुछ मीडिया चैनलों ने भ्रामक जानकारी चलाई है कि महाकाल मंदिर व नागचंद्रेश्वर में भगदड़ हुई है. ऐसा कुछ भी नहीं है. केवल भारी भीड़ की वजह से कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी थी, जिन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया. सावन सोमवार के साथ नागपंचमी होने से लाखों लोग यहां पहुंचे हैं.”

लाखों लोगों की भीड़ को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संभालना किसी भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है. उज्जैन में यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर मैदान में तैनात हर जवान, हर कर्मचारी तक पहुंचती है. एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया, ” करीब 2400 पुलिसकर्मियों को 36 घंटे तक ड्यूटी पर लगाया गया है. सुरक्षा व्यवस्था में 10 ड्रोन, अश्वारोही दल और बम निरोधक दस्ते भी तैनात हैं. जिन श्रद्धलुओं की तबियत बिगड़ रही है उन्हें तत्काल जवानों द्वारा अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलवाया जा रहा है. अफरा तफरी जैसी कोई सूचना नहीं है.”

एसपी ने आगे कहा, ” यातायात डायवर्जन लागू कर भीड़ के दबाव को मुख्य मार्गों से कम करने की कोशिश की जा रही ह. गूगल मैप की मदद से लोगों को ऐसे मार्ग बताए जा रहे हैं, जहां ट्रैफिक कम है और आसानी से वे पार्किंग तक और शहर के बाहर निकल पाएं.”

उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा, ” तमाम श्रद्धलुओं को सुगमता से दर्शन करवाए जा रहे हैं. 10 लाख श्रद्धालुओं के अनुसार व बैकअप प्लान तैयार करके व्यवस्थाएं की गई है पीने का पानी, मेडिकल सुविधाएं, जूता चप्पल स्टैंड व अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं. 600 से अधिक प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी व्यवस्थाओं को देख रहे हैं.”

इस पूरी व्यवस्था की दूसरी तस्वीर श्रद्धालुओं के संघर्ष की है. मंदिर तक पहुंचने के लिए कई श्रद्धालुओं को करीब 8 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है. इसके बाद लंबी कतार में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. किसी के साथ छोटे बच्चे हैं, कोई बुजुर्ग माता-पिता का हाथ पकड़े आगे बढ़ रहा है और कई परिवार रविवार सोमवार की दरमियानी रात से ही कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. रास्ते में थकान, भीड़ और लगातार पैदल चलना उनके धैर्य की परीक्षा ले रहा है. लेकिन इस पूरी मेहनत का सबसे भावुक क्षण तब आता है, जब घंटों की कतार के बाद श्रद्धालु दर्शन स्थल तक पहुंचता है. कई घंटे का इंतजार और कई किलोमीटर का सफर, लेकिन सामने दर्शन का अवसर मिलता है तो महज चंद सेकंड. यही कारण है कि मंदिर परिसर के बाहर भीड़ कई बार अनियंत्रित हो जाती है.

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