बिहार के लखीसराय से सावन के तीसरे सोमवार पर एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। अशोक धाम मंदिर में जलाभिषेक के लिए उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में 7 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 23 से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। इनमें 3 की हालत गंभीर है और उन्हें PMCH रेफर किया गया है।

बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच मंदिर जाने वाली लाइन अशोकधाम स्टेशन तक पहुंच गई थी। इसी दौरान पुरुषों की लाइन की तरफ एक पोल गिर गया। इसके बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का करंट दौड़ गया है। अफवाह फैलते ही श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। भीड़ का दबाव महिलाओं की लाइन की तरफ बढ़ा और देखते ही देखते बैरिकेडिंग टूट गई। कई महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिर गईं और चीख-पुकार मच गई।

हालांकि लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, जिस तार के गिरने की बात फैली थी, वह चालू बिजली का तार नहीं बल्कि केबल वायर था। प्रशासन के मुताबिक हादसा महज कुछ मिनटों के भीतर हुआ।हादसे के बाद घायलों को तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाया गया। मौके पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और राहत-बचाव का काम शुरू किया गया। कुछ समय बाद मंदिर में फिर से जलाभिषेक शुरू कर दिया गया।

हादसे में जान गंवाने वाली महिलाओं में लखीसराय की मधुबाला देवी, मनमाला देवी, हेमलता देवी और मुंगेर की रिंकू देवी की पहचान हो चुकी है।इस दर्दनाक हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था कैसे रही और अफवाह फैलते ही भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सका? बिहार सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की बात कही है।सावन के पवित्र सोमवार को मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच कुछ ही पलों में ऐसा मातम छाया कि खुशियों और आस्था का माहौल चीख-पुकार में बदल गया।

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