रोहतक में रोडवेज कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए 3648 परमिट देने के फैसले पर नाराजगी जताई।
कर्मचारियों का कहना है कि निजी बसों को परमिट देने से सरकारी परिवहन व्यवस्था और रोडवेज कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और रोडवेज को मजबूत करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और सरकार के खिलाफ विरोध जताया।

सुमेर सिवाच ने कहा कि हरियाणा सरकार ने प्राइवेट परमिट व प्राइवेट इलेक्ट्रिक बसें 62.37 रुपए प्रति किलो मीटर के हिसाब से चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 362 रूटों पर 3648 पर प्राइवेट परमिट मंजूर किए गए है, जिसके लिए आवेदन भी मांगे जा रहे हैं। ऐसा करके सरकार रोडवेज को निजी हाथों में सौंपना चाहती है।

इलेक्ट्रिक बस खरीदने की बात कर रही है, जबकि एक इलेक्ट्रॉनिक बस के बदले साधारण 6 बसें आती हैं। हरियाणा के सभी डिपो में 50-50 बसें लेने का जो निर्णय है, अगर उसकी जगह साधारण 300-300 बसें डिपो के बेड़े में शामिल की जाए, तो प्रदेश में लगभग 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होंगी। साथ ही 43200 बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

सरकार जो 3648 परमिट प्राइवेट बसों को देने जा रही है, उनमें हरियाणा रोडवेज में 47 विभागों को मिलने वाली सब्सिडी नहीं दी जाएगी। साथ ही जनता को प्राइवेट संसाधनों में बैठकर अपनी जान गंवानी पड़ेगी। सरकार रोडवेज के निजीकरण की नीतियों को बंद करें और हरियाणा रोडवेज के बेड़े में नई बसों को शामिल करे।

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