पानीपत में साइबर धोखाधड़ी की जांच के नाम पर व्यापारियों और आम नागरिकों के बैंक खाते फ्रीज किए जाने का मामला अब केंद्र तक

पहुंच गया है। जगदीश धमीजा, जो CA ब्रांच के पूर्व चेयरमैन और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के कार्यकारी सदस्य हैं, ने 6 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

देशभर की प्रक्रिया पर सवाल, किसी एक राज्य पर नहीं निशाना
धमीजा ने स्पष्ट किया कि यह शिकायत किसी एक साइबर सेल या क्षेत्र विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे देश में अपनाई जा रही जांच प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि केरल, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों की साइबर सेल से आने वाली शिकायतों के आधार पर देशभर के व्यापारियों के खाते फ्रीज किए जा रहे हैं।

‘लेयरिंग’ सिस्टम से बढ़ रही परेशानी
धमीजा ने बताया कि साइबर फ्रॉड में पैसा कई स्तरों (लेयर्स) से होकर गुजरता है—पहले स्तर पर अपराधी के खाते में, फिर आगे अन्य खातों में ट्रांसफर होता रहता है।
उनका तर्क है कि पहले स्तर पर शामिल व्यक्ति संदिग्ध हो सकता है, लेकिन बाद के स्तरों पर पैसा पाने वाले कई लोग पूरी तरह निर्दोष होते हैं, क्योंकि यह रकम सामान्य व्यापारिक लेन-देन में शामिल हो जाती है।

छोटी रकम, बड़ा नुकसान
शिकायत में कहा गया है कि कई मामलों में व्यापारियों को केवल 1,000 से 5,000 रुपए तक का भुगतान मिला, लेकिन इसके चलते उनके पूरे बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए, जिनमें लाखों-करोड़ों रुपए जमा थे।
इससे व्यापारी न तो भुगतान कर पा रहे हैं और न ही व्यापार चला पा रहे हैं, जिससे बाजार में उनकी साख भी प्रभावित हो रही है।

गृह मंत्रालय से तत्काल निर्देश की मांग
धमीजा ने मांग की है कि:

  • पूरे खाते को फ्रीज करने के बजाय केवल संदिग्ध राशि को ही होल्ड किया जाए।
  • यदि मुख्य आरोपी (पहले स्तर) के खाते से ही पर्याप्त रकम मिल जाती है, तो आगे के स्तरों पर निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय इस संबंध में तुरंत स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे, ताकि व्यापारियों को राहत मिल सके।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद व्यापारिक वर्ग में चिंता बढ़ गई है और अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!