करनाल, 27 जून। करनाल में एक 7 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद शव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि निजी अस्पताल बकाया बिल का हवाला देकर बच्चे का शव सौंपने में देरी कर रहा है। वहीं परिवार ने प्रशासन, फैक्ट्री मालिक और संबंधित अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार पानीपत निवासी रघुनाथ का 7 वर्षीय पुत्र सिद्धार्थ एक फैक्ट्री परिसर में घायल हो गया था। परिजनों के मुताबिक फैक्ट्री गेट के पास खड़े होने के दौरान बच्चे के ऊपर लोहे का एंगल गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए करनाल रेफर किया गया।

परिजनों का कहना है कि बच्चे के इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में करीब ढाई से तीन लाख रुपए तक खर्च किए गए। बाद में उसे करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता रघुनाथ के मुताबिक अस्पताल का लगभग डेढ़ लाख रुपए का बिल बना है, जिसमें से कुछ राशि पहले ही जमा करवाई जा चुकी है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे पूरा भुगतान करने में असमर्थ हैं। परिजनों का आरोप है कि बकाया राशि के कारण अस्पताल प्रबंधन शव देने में आनाकानी कर रहा है। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। मामले को लेकर परिजनों ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने और बच्चे का शव दिलाने की मांग की है, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और संबंधित पक्षों से सहायता की अपील की गई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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