वृंदावन के प्रख्यात आध्यात्मिक संत प्रेमानंद महाराज ने एकांतवास में जाने का ऐलान किया है। इस दौरान उन्होंने अपने अनुयायियों और भक्तों के लिए एक भावुक संदेश भी दिया। महाराज ने कहा कि अब वह ना किसी को दीक्षा देंगे और ना ही नए शिष्य बनाएंगे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से भजन और साधना में मन लगाने की अपील करते हुए कहा कि अब उन्हें अपने अंतिम आध्यात्मिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना है।

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि समय के साथ आध्यात्मिक जीवन में कई प्रकार की बाहरी बातें और व्यवधान बढ़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अब आनंद और भक्ति के मार्ग में प्रपंच प्रवेश करने लगा है, इसलिए वह स्वयं को एकांत में रखकर साधना और ईश्वर चिंतन में समय बिताना चाहते हैं। उनका मानना है कि यह निर्णय उनके साथ-साथ उनके अनुयायियों के हित में भी है।

महाराज ने स्पष्ट किया कि एकांतवास का निर्णय उन्होंने अपने स्वास्थ्य और मानसिक शांति को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने भक्तों से किसी प्रकार की चिंता या निराशा न करने की अपील की। उनका कहना है कि यह कदम पूरी तरह आध्यात्मिक साधना और आत्मिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

बताया जा रहा है कि प्रेमानंद महाराज तीन वर्षों में एक बार आने वाले पुरुषोत्तम मास के दौरान एकांतवास कर रहे हैं। इस विशेष अवधि में वह अपना अधिकांश समय यमुना तट पर स्थित एक कुटिया में व्यतीत कर रहे हैं। यहां वह मौन साधना, भजन और ईश्वर चिंतन में लीन रहेंगे।

एकांतवास में जाने से पहले प्रेमानंद महाराज ने अपने शिष्यों और भक्तों को संबोधित करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हम मिलें या न मिलें, बोलें या न बोलें, लेकिन हम आप सभी से बहुत प्रेम करते हैं। हमारी इच्छा है कि सभी को श्रीजी की कृपा प्राप्त हो। अगर मैं आऊं या न आऊं, बिना बोले भी मैं आपके मन और स्मृति में रहूंगा।”

पिछले करीब 10 दिनों से स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते प्रेमानंद महाराज ने अपनी नियमित गतिविधियों को सीमित कर दिया था। वह न तो एकांतिक वार्ता कर रहे थे और न ही एकांतिक दर्शन दे रहे थे। उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा भी पिछले कुछ दिनों से बंद थी। रविवार को उन्होंने इंटरनेट पर एक वीडियो जारी कर अपने एकांतवास और मौन धारण करने की जानकारी भक्तों को दी।

प्रेमानंद महाराज के एकांतवास में जाने की खबर से उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं में निराशा का माहौल है। देशभर से बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन के लिए मथुरा और वृंदावन पहुंचते हैं। हालांकि एकांतवास के बावजूद कई श्रद्धालु अभी भी पदयात्रा मार्ग पर उनके दर्शन की आशा में खड़े दिखाई दे रहे हैं। भक्तों का कहना है कि महाराज के दर्शन और प्रवचन से उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है, इसलिए उनके एकांतवास की खबर ने उन्हें भावुक कर दिया है।

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