हरियाणा में इस साल गर्मी के दौरान बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। हरियाणा पावर परचेज सेंटर (HPPC) के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य की अधिकतम बिजली मांग लगभग 16,454 मेगावाट तक जा सकती है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा।

बढ़ती मांग और संभावित आपूर्ति कमी को देखते हुए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने जून से अगस्त के बीच 687 मेगावाट शॉर्ट टर्म बिजली खरीद को मंजूरी दी है।

विभागीय प्रवक्ता विनोद कुमार के अनुसार, मई महीने के लिए भी 6.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से 1,345 मेगावाट बिजली खरीद का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे संशोधित कर सीमित अवधि के लिए लागू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती खपत को देखते हुए पहले से ही अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है, ताकि गर्मी के पीक सीजन में आपूर्ति बाधित न हो।

बिजली संकट से निपटने के लिए आपात खरीद योजना भी लागू की गई है। इसके तहत गुजरात के मुंद्रा स्थित कोस्टल गुजरात पावर लिमिटेड (CGPL) से 380 मेगावाट और केंद्रीय विद्युत स्टेशनों से 337 मेगावाट अतिरिक्त बिजली लेने का निर्णय लिया गया है।

आपूर्ति के अनुमान के अनुसार मई में 988 मेगावाट, जून में 2,532 मेगावाट और जुलाई में 2,605 मेगावाट तक बिजली की कमी हो सकती है। हालांकि अगस्त में यह कमी घटकर 1,428 मेगावाट और सितंबर में 296 मेगावाट तक रह जाएगी।

राज्य की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 16,604.71 मेगावाट है, जबकि पिछले साल 2025 में गर्मी के पीक सीजन (मई-जुलाई) में अधिकतम मांग 15,300 मेगावाट तक पहुंची थी। इस बार इसमें बड़ा इजाफा होने की संभावना है। सरकार और बिजली विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए अग्रिम तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि उपभोक्ताओं को कटौती का सामना न करना पड़े।

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