दिल्ली। मई के महीने में चिलचिलाती गर्मी का सामना कर रही जनता को आज सुबह सरकारी तेल कंपनियों ने मंहगाई का एक और करारा झटका दिया है। लोग अभी अपने रोजमर्रा के कामों के लिए घरों से निकल ही रहे थे कि पेट्रोल पंपों पर नई दरें लागू हो गईं। देश की तीनों प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने पेट्रोल पर 87 पैसे और डीजल पर 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। बीते 10 दिनों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की इस संचयी वृद्धि ने नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग का घरेलू बजट पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

ताजा संशोधन के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की नई कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से महज 49 पैसे दूर है। वहीं, डीजल भी 92.49 रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू चुका है। देश के अन्य मेट्रो शहरों की स्थिति और भी गंभीर है; कोलकाता में पेट्रोल 110.64 रुपये, मुंबई में 108.49 रुपये और चेन्नई में 105.31 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। गौरतलब है कि तेल कंपनियों ने करीब चार साल की स्थिरता के बाद 15 मई को पहली बार दरों में 3 रुपये का बड़ा बदलाव किया था, जिसके बाद से यह सिलसिला लगातार जारी है।

घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में आ रही इस भारी तेजी की मुख्य वजह सात समंदर पार चल रही भू-राजनीतिक हलचल है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। चूंकि भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार की इस तपिश से भारतीय बाजार और यहां की अर्थव्यवस्था का झुलसना तय माना जा रहा था।

पेट्रोल-डीजल के दामों में इस वक्त हुई बढ़ोतरी देश के ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ा संकट लेकर आई है। इस समय कई राज्यों में गेहूं की कटाई का अंतिम चरण और धान की बुवाई की तैयारियां चल रही हैं, जहां ट्रैक्टर और पंपसेट चलाने के लिए डीजल की भारी मांग होती है। इसके अलावा, डीजल महंगा होने से देश के भीतर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (मालभाड़ा) तुरंत बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर मंडियों में आने वाले फल, हरी सब्जियों, दूध और राशन की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई के आंकड़े और अधिक डराने वाले हो सकते हैं।

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