रोहतक में राष्ट्रीय हेल्थ मिशन (NHM) के कर्मचारियों ने मंगलवार को अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। एनएचएम कर्मचारी कटोरा लेकर व पीपीई किट पहनकर सड़कों पर उतरे। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से यहां भीख मांगी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भीख से इकट्‌ठा हुए रुपयों को वे सरकार की नींद खोलने के लिए सरकार को भेजेंगे। क्योंकि सरकार कहती है कि उनके पास पैसा नहीं है। इसलिए भीख में मांगकर एकत्रित हुए पैसे को सरकार को देने फैसला लिया है।

NHM कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान डॉ. अंकित फोगाट ने कहा कि वे पिछले 19 दिनों से लगातर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्ष 1997 से एनएचएम कर्मचारी लगातार 27 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग हरियाणा में सेवाएं दे रहे है। एनएचएम कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। एनएचएम कर्मचारियो का दैनिक वेतन मनरेगा के तहत मिलने वाली दैनिक मजदूरी से भी कम है, जो कि वर्ष 2024-25 मे 363 रुपए प्रतिदिन है, जबकि एक एनएचएम कर्मचारी को शुरूआत मे 5 वर्षों के लाए आज भी मात्र 7580 रुपए प्रतिमाह (लगभग 252 रुपए प्रतिदिन) मिलते है। 10 वर्षों से भी ज्यादा समय से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारियों की भर्ती स्थानीय स्तर पर हरियाणा सरकार के रोजगार नियमानुसार हुई थी। इसमें हरियाणा के निवासियों को प्राथमिकता दी गई थी। एनएचएम कर्मचारी हरियाणा प्रदेश के आमजन की स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति वचनबद्ध है।

जिसके कारण हरियाणा प्रदेश की मातृत्व मृत्यु दर व शिशू मृत्यु दर भी देश मे सबसे कम है। हरियाणा सरकार के उच्च अधिकारी एनएचएम कर्मचारियो के साथ हुई बैठकों के दौरान केन्द्र से मिलने वाले सहायता राशि की कमी व राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ने का हवाला देकर एनएचएम कर्मचारियों की जायज मांगों को नकारते हैं।

फंड की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से प्रदेश भर में एनएचएम कर्मचारियों ने भीख मांगी। एकत्र राशि को हरियाणा सरकार के खजाने में जमा करने का निश्चय किया है, ताकि हरियाणा सरकार के खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ की भरपाई की जा सके।

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