हरियाणा के झज्जर की गोल्डन गर्ल और ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने अपने गुरु और कोच जसपाल सिंह राणा के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की है। कोच के निधन के एक दिन बाद मनु ने सोशल मीडिया पर उनके साथ अपनी तीन खास तस्वीरें साझा करते हुए सिर्फ दो शब्द लिखे— “अपूर्णीय क्षति”। इन दो शब्दों में ही अपने गुरु को खोने का दर्द और सम्मान साफ झलक गया।

मनु द्वारा साझा की गई तस्वीरें उनके और जसपाल राणा के वर्षों पुराने रिश्ते और संघर्षों की कहानी बयां करती हैं। एक तस्वीर ओलंपिक रिंग्स के सामने की है, जबकि अन्य तस्वीरों में दोनों अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान भारतीय तिरंगे के साथ नजर आ रहे हैं। ये तस्वीरें भारतीय शूटिंग की सबसे सफल गुरु-शिष्य जोड़ियों में से एक की यादों को संजोए हुए हैं।

2016 में शुरू हुआ था सफर

मनु भाकर और जसपाल राणा का साथ वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। शुरुआत में जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के कोच थे, लेकिन बाद में वे मनु के निजी कोच भी बने। समय के साथ दोनों का रिश्ता केवल खिलाड़ी और कोच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार जैसा बन गया था। खेल के अलावा जीवन के कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी दोनों के बीच खुलकर चर्चा होती थी।

आखिरी बातचीत अब बन गई याद

करीबी सूत्रों के अनुसार, जसपाल राणा के निधन से एक दिन पहले मनु और उनके बीच फोन पर बातचीत हुई थी। उस दौरान राणा अपनी तबीयत में हो रहे सुधार की जानकारी दे रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह दोनों की आखिरी बातचीत साबित होगी।

कैंप में मिली दुखद खबर

शुक्रवार को जब जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई, उस समय मनु भाकर देहरादून में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के कैंप में हिस्सा ले रही थीं। बताया जाता है कि शुरुआत में यह खबर उनसे छिपाकर रखी गई, लेकिन जैसे ही उन्हें अपने गुरु के निधन की जानकारी मिली, वे गहरे सदमे में आ गईं। भावुक मनु ने मुकाबला भी बीच में छोड़ दिया।

भारतीय शूटिंग ने खोया बड़ा मार्गदर्शक

भारतीय शूटिंग में जसपाल राणा और मनु भाकर की जोड़ी को सबसे सफल गुरु-शिष्य जोड़ियों में गिना जाता है। मनु की कई अंतरराष्ट्रीय सफलताओं के पीछे जसपाल राणा की मेहनत, मार्गदर्शन और अनुभव का बड़ा योगदान माना जाता है।

ऐसे में उनके निधन ने न केवल भारतीय शूटिंग जगत को झटका दिया है, बल्कि मनु भाकर के जीवन में भी एक ऐसा खालीपन छोड़ दिया है जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। सोशल मीडिया पर लिखे गए “अपूर्णीय क्षति” शब्द इसी गहरे दुख और अपने गुरु के प्रति अटूट सम्मान का प्रतीक बन गए हैं।

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