पानीपत में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस समय जिले में 2016 एक्टिव केस हैं। कोरोना की चपेट में सरकारी डॉक्टर भी आ गए हैं। आलम यह है कि मरीजों के इलाज के लिए ट्रेनी को ही फुल फ्लैश चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है।
अब बाकी बचे डॉक्टरों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। डॉक्टरों का कहना है कि नई गाइडलाइन के अनुसार, कोरोना संक्रमण से मरने वालों के शवों को सिविल अस्पताल में नहीं रखा जाएगा। यहां तक की कोरोना संदिग्ध मरीजों के शव भी नहीं रखे जाएंगे। इन शवों को जनसेवा दल के सुपुर्द किया जाएगा। जनसेवा दल पदाधिकारी कोरोना की पूरी गाइडलाइन के मुताबिक शवों का अंतिम संस्कार करेंगे।
अगर किसी मरीज की घर पर मौत होती है तो उस संबंध में भी स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी निर्धारित नहीं है। परिजनों को जन सेवा दल की मदद से शिवपुरी में कोविड गाइडलाइन के अनुसार अंतिम संस्कार करना होगा। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान ने इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को निर्देश जारी कर दिए हैं।
बिशनस्वरूप कॉलोनी स्थित निजी अस्पताल में 28 वर्षीय युवती की मौत हो गई थी। युवती को कोरोना संक्रमण का संदिग्ध मरीज बताया जा रहा, परिजन उसका शव लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने शव को रखने से इंकार कर दिया। क्योंकि नई गाइडलाइन के अनुसार, कोरोना संक्रमण से मरने वालों के शवों को सिविल अस्पताल में नहीं रखा जाएगा। इसलिए परिजनों ने जन सेवा दल से बात की। फिर जन सेवा दल के सदस्यों ने ही शुक्रवार रात को शिवपुरी में मृतका का अंतिम संस्कार किया। स्वास्थ्य विभाग ने युवती की मृत्यु कोरोना से होने की पुष्टि नहीं की है।
जिस अस्पताल में मरीज की मौत होगी उसकी ही जिम्मेदारी है कि वो शव को अपने अस्पताल में रखें। शवों का कोविड गाइडलाइन के अनुसार अंतिम संस्कार करवाए। इस संबंध में सिविल सर्जन की ओर से निजी अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल
