हरियाणा के सेकेंडरी शिक्षा विभाग ने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कैजुअल पेड लीव (CPL) से जुड़े विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा की ओर से जारी नए आदेश में 9 मार्च 2026 को जारी निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है। इससे प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को राहत मिली है।
दरअसल, 9 मार्च 2026 को जारी आदेश के तहत कर्मचारियों की CPL से संबंधित फाइलों को जिला उपायुक्त (DC) की अनुशंसा के बाद ही मुख्यालय भेजने का प्रावधान किया गया था। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि इससे अवकाश संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी हो रही थी और कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा था।
अब महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा जितेंद्र कुमार द्वारा 18 जून 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 9 मार्च 2026 के आदेश के तहत CPL मामलों में जिला उपायुक्त की अनुशंसा अनिवार्य करने संबंधी निर्देश तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाते हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों की CPL से जुड़ी फाइलों पर DC की सिफारिश की बाध्यता समाप्त हो गई है।
विभाग द्वारा जारी नए आदेश की प्रतियां प्रदेश के सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों, एससीईआरटी निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा निदेशालय की विभिन्न शाखाओं को भेजी गई हैं। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित किया जाए।
शिक्षा विभाग के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि इससे CPL मामलों के निपटान में तेजी आएगी और अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी।
