हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्राओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने ‘मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना’ (MMDUY) के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को फोर्टिफाइड स्किम्ड फ्लेवर्ड मिल्क पाउडर और प्रोटीन मिल्क बार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किशोरियों में पोषण की कमी को दूर करना और उन्हें शारीरिक रूप से सशक्त बनाना है।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय, पंचकूला ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही हेतु मांग (डिमांड) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल उच्च कक्षाओं की छात्राओं तक ही सीमित रहेगा।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों को 1 सितंबर से 8 सितंबर 2026 के बीच MIS पोर्टल पर अपनी मांग दर्ज करनी होगी। स्कूल प्रभारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर डेटा अपलोड हो जाए। किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर छात्राओं के पोषण से जुड़ा मामला है।
मांग दर्ज करते समय स्कूल प्रभारियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें अपने स्कूल में पहले से उपलब्ध स्टॉक की सटीक गणना करनी होगी और वर्तमान स्टॉक को घटाकर ही कुल आवश्यकता का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज करना होगा। इससे संसाधनों का सही प्रबंधन सुनिश्चित हो सकेगा और किसी भी प्रकार की बर्बादी को रोका जा सकेगा।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर केवल 9वीं से 12वीं कक्षा की छात्राओं का ही डेटा भरा जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में मिड-डे-मील (MDM) से संबंधित किसी भी जानकारी को शामिल करने की अनुमति नहीं है। यह स्पष्टीकरण इसलिए दिया गया है ताकि योजना के डेटा में कोई भ्रम न रहे और लक्ष्य समूह को सही लाभ मिल सके।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) द्वारा की जाएगी। DEO अपने स्तर पर पोर्टल लॉगिन करके यह देख सकेंगे कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले किस स्कूल ने अब तक अपनी मांग दर्ज नहीं की है। यदि किसी स्कूल द्वारा निर्धारित समय तक डेटा नहीं भरा जाता है, तो संबंधित स्कूल प्रभारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए फोर्टिफाइड दूध और प्रोटीन बार की उपलब्धता एक सराहनीय प्रयास है। अक्सर देखा गया है कि किशोरावस्था में पोषण की कमी के कारण छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सरकार की यह योजना न केवल उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करेगी, बल्कि स्कूलों में छात्राओं की उपस्थिति और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार लाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
आने वाले समय में शिक्षा विभाग इस योजना के प्रभाव का आकलन भी कर सकता है। फिलहाल, सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों में इस योजना के सफल क्रियान्वयन को प्राथमिकता दें। स्कूल स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य है कि डेटा प्रविष्टि में पूर्ण सटीकता बरती जाए।

