दिल्ली में ब्लास्ट और फरीदाबाद में मिले 2900KG विस्फोटक के तार आपस में जुड़ रहे हैं। दोनों में एक ही बात कॉमन है, वह है फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी। इस यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मुजम्मिल को विस्फोटक जमा करने को लेकर गिरफ्तार किया गया है। जबकि, यहां पढ़ाने वाले मोहम्मद उमर नबी ने i-20 कार में विस्फोटक के साथ खुद को उड़ा लिया।
बुधवार को यूनिवर्सिटी ने पहली बार बयान जारी किया। वाइस चांसलर प्रो. भूपिंदर कौर आनंद ने कहा कि हमारे 2 डॉक्टर (डॉ. मुजम्मिल और शाहीन सईद) हिरासत में हैं। उनकी ड्यूटी के अलावा यूनिवर्सिटी का इससे कोई संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी के अंदर किसी भी तरह का केमिकल या विस्फोटक नहीं रखा जाता। हमारी लैब का इस्तेमाल सिर्फ MBBS के छात्रों को पढ़ाने और ट्रेनिंग देने के लिए होता है। हर काम कानून के हिसाब से किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मौलवी इश्तियाक को गिरफ्तार किया है। उसे पूछताछ के लिए श्रीनगर ले जाया गया है। मौलवी इश्तियाक वही व्यक्ति है, जिसने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल शकील को अपना फतेहपुर तगा गांव वाला मकान किराए पर दिया था।
9 नवंबर को इसी घर से पुलिस ने 2563 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद कर डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया था। इश्तियाक मूल रूप से नूंह जिले के सिंगार गांव का रहने वाला है। 10 साल से वह परिवार के साथ फतेहपुर तगा गांव में रह रहा है और यहीं मस्जिद में इमाम है।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले वह 15 दिन की छुट्टी लेकर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा गया था। वहां उसने अपने संपर्कों से मुलाकात की और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री एकत्रित की। वहां से आने के बाद वह फतेहपुर तगा में इश्तियाक के घर रुका था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में आने वाले लोगों को चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड मेडिकल एरिया में जाने वालों पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं। हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है कि वे क्यों आए हैं, और यदि कोई बाहरी व्यक्ति संदिग्ध लगता है, तो गार्ड उसके साथ तब तक रहते हैं जब तक वह बाहर नहीं निकल जाता। मेडिकल क्षेत्र में लगे सभी पुराने नोटिस हटा दिए गए हैं और नए नोटिस लगाए गए हैं।
यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) भूपिंदर कौर आनंद ने कहा कि अल-फलाह ग्रुप 1997 से कई कॉलेज और स्कूल चला रहा है। 2009 में इसे खुद के कोर्स चलाने की अनुमति मिली और 2014 में यह यूनिवर्सिटी बन गई। इसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने भी मान्यता दी है।
अल-फलाह अस्पताल 2019 से मेडिकल कॉलेज चला रहा है और यह भारतीय यूनिवर्सिटीज के संगठन का सदस्य भी है। हमारी यूनिवर्सिटी MBBS के छात्रों को पढ़ाती है। यहां से पास हुए डॉक्टर आज देश के बड़े अस्पतालों में काम कर रहे हैं। हमने 2023 में कुछ विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स (MD/MS) भी शुरू किए हैं।
हाल में जो बुरी घटनाएं हुई हैं, उनसे हमें बहुत दुख हुआ है और हम उनकी कड़ी निंदा करते हैं। हम उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्हें इन घटनाओं से नुकसान हुआ है।
हमें पता चला है कि हमारे दो डॉक्टरों को जांच एजेंसियां पकड़ कर ले गई हैं। हम साफ कर देना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी का इन लोगों से कोई रिश्ता नहीं है, बस इतना है कि ये लोग यहां काम करते थे।
यूनिवर्सिटी उन झूठी खबरों से परेशान है जो कुछ वेबसाइटों पर फैलाई जा रही हैं। इन खबरों का मकसद यूनिवर्सिटी की इज्जत खराब करना है। हम इन सभी झूठे आरोपों को गलत बताते हैं।
हम यह भी साफ कर देना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी के अंदर किसी भी तरह का केमिकल या विस्फोटक नहीं रखा जाता, जैसा कि कुछ लोग कह रहे हैं। हमारी प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल सिर्फ MBBS के छात्रों को पढ़ाने और ट्रेनिंग देने के लिए होता है। हर काम सुरक्षा नियमों और कायदे-कानून के हिसाब से किया जाता है।

