अग्निपथ योजना को लेकर मचे बवाल के बीच तीनों सेनाओं की तरफ से एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इसमें सेना प्रमुख ने कहा कि सारी भर्तियां अब अग्निपथ योजना से ही होंगी। सेना प्रमुखों ने अग्निपथ स्कीम को वापस लेने की किसी भी संभावना से सेना ने इनकार किया है। पुराने अभ्यर्थी अब मान्य नहीं होंगे। 

सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पूरी ने बताया कि यह सुधार लंबे समय से लंबित था। हम इस सुधार के साथ देश की तीनों सेनाओं में युवावस्था और अनुभव का अच्छा मिश्रण लाना चाहते हैं। सेना ने अपने अहम बयान में कहा है कि कोचिंग संस्थान छात्रों को भड़का और उकसा रहे हैं। जनरल पुरी ने कहा कि हिंसा और प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले युवाओं के लिए सेना में कोई जगह नहीं। 

अनिल पुरी ने कहा कहा कि ‘अग्निवीरों’ को सियाचिन और अन्य क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में वही भत्ता मिलेगा जो वर्तमान में सेवारत नियमित सैनिकों पर लागू होता है। सेवा शर्तों में उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। जो कपड़े सेना के जवान पहनते हैं वहीं कपड़े अग्निवीर पहनेंगे, जिस लंगर में सेना के जवान खाना खाते हैं वहीं पर अग्निवीर खाएंगे। जहां पर सेना के जवान रहते हैं वहीं पर अग्निवीर ही रहेंगे।

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सेना ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सेना को युवा लोगों की जरूरत है। आज सेना की औसत उम्र 32 साल है, इसे हम कम करके 26 साल पर करने की कोशिश करने की कोशिश कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा कि युवा ज्यादा रिस्क ले सकते हैं ये हम सभी को पता है। उन्होंने कहा कि 1989 में इस योजना पर विचार करना शुरू हो गया। और इसे लागू करने से पहले कई देशों में सेना में नियुक्तियों और वहां के एग्जिट प्लान का अध्ययन किया गया।

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तीनों सेनाओं की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि, हमें यूथफुल प्रोफाइल चाहिए। आप सभी को पता है कि 2030 में हमारे देश में 50 फीसदी लोग 25 साल की उम्र से कम होंगे। क्या ये अच्छा लगता है कि देश की सेना जो रक्षा कर रही है वो 32 साल की हो। हमारी कोशिश है कि हम किसी तरह से यंग हो जाएं। इस बारे में कई लोगों से बातचीत की गई, बाहरी देशों की भी स्टडी की गई। सभी देशों में देखा गया कि उम्र 26, 27 और 28 साल थी। भर्ती होने के तीन से चार तरीके हैं। सभी में कोई भी कभी भी बाहर निकल सकते हैं। उन देशों में भी वही चुनौतियां हैं जो हमारे यूथ के सामने हैं।

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