दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध की गूंज हरियाणा में भी सुनाई दी। गुरुवार को गुरुग्राम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने जा रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मुख्य गेट पर रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बाद में बैरिकेड हटाकर डीसी कार्यालय परिसर तक पहुंच गए।
वहीं, ओलंपियन पहलवान और कांग्रेस नेता बजरंग पूनिया भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और कहा, “सबका नंबर आएगा।” उन्होंने छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की भी अपील की।
उधर, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स ने क्लास छोड़कर रोष मार्च निकाला। सिरसा में JJP ने ताऊ देवीलाल की प्रतिमा के सामने दिन-रात का धरना शुरू कर दिया है। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के बाद एनएसयूआई की अगुवाई में स्टूडेंट्स ने गेट के बाहर प्रदर्शन कर शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका। यमुनानगर, कुरुक्षेत्र में भी प्रदर्शन हुए।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर सिरसा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि हरियाणा में आयोजित सीईटी (CET) और नीट (NEET) परीक्षाएं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुईं। उनके अनुसार, परीक्षा के दौरान किसी छात्र या अभिभावक की ओर से कोई शिकायत सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए परिवहन सहित आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की थीं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष और इंडिया गठबंधन के नेताओं पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के हितों को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं किसी प्रकार की अनुचित घटना हुई है तो उसके तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक मामलों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने की बात भी कही।
बजरंग पूनिया ने कहा कि सरकार का पहला कदम कमेटी बनाना होता है। इस कमेटी का मकसद केवल मौके पर जुटी भीड़ को तितर-बितर करना और आंदोलन को कमजोर करना होता है।
सच्ची सुरक्षा आपस में एक होने से है, न कि जाति या धर्म के नाम पर बंटने से। ‘एक हैं तो सेफ हैं’ का नारा तभी साकार होगा जब सब साथ आएंगे। देश में न बेहतर शिक्षा मिल रही है और न ही स्वास्थ्य। जब तक व्यवस्था ठीक नहीं होती, तब तक यह क्रांति रुकनी नहीं चाहिए।

