हरियाणा के रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजीआईएमएस में मानवता की मिसाल देखने को मिली। झज्जर के 14 वर्षीय अंशु को सड़क हादसे के बाद डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद दुख की घड़ी में भी परिजनों ने बड़ा फैसला लेते हुए अंशु के अंगदान की सहमति दी, जिससे कई मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा।
मृतक किशोर की पहचान अंशु पुत्र विकास निवासी गांव सोंधी, जिला झज्जर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार 18 मई को अंशु बाइक से अपनी मां को लेने जा रहा था। इसी दौरान एक बोलेरो पिकअप ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के बाद परिजन उसे इलाज के लिए पहले एसजीटी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही।
अंशु के पिता विकास ने बताया कि डॉक्टरों ने ब्रेन डेड होने की आशंका जताई थी, जिसके बाद 20 मई की शाम उसे पीजीआईएमएस रोहतक के ट्रॉमा सेंटर लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दो बार हुए मेडिकल टेस्ट में अंशु को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
इसके बाद हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. एचके अग्रवाल ने परिजनों से अंगदान को लेकर बातचीत की और उन्हें इसके महत्व के बारे में समझाया। परिवार की सहमति मिलने के बाद राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) हरियाणा को सूचना दी गई। बाद में राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के निर्देश पर अंशु का लीवर दिल्ली स्थित आईएलबीएस अस्पताल भेजा गया।
डॉक्टरों के अनुसार अंशु के लीवर, दोनों किडनी और दोनों आंखों के कॉर्निया दान किए गए हैं। लीवर को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दिल्ली पहुंचाया गया, जबकि दोनों किडनी और कॉर्निया पीजीआईएमएस में जरूरतमंद मरीजों को दिए जाएंगे।
अंशु के पिता ने बताया कि उन्होंने अभी तक अंशु की मां को उसके निधन की जानकारी नहीं दी है, क्योंकि वह पहले से बीमार रहती हैं और यह सदमा सहन नहीं कर पाएंगी। उन्होंने कहा कि बेटे के अंगदान से अगर किसी की जिंदगी बचती है, तो इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं हो सकता।
पीजीआईएमएस के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर ने बताया कि भारत में हर साल लाखों लोग अंग न मिलने के कारण जान गंवा देते हैं, जबकि एक ब्रेन डेड व्यक्ति 8 से 9 लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
