हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक सहीराम धारणिया का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से न करने का मामला तूल पकड़ रहा है। बिश्नोई समाज और परिजनों ने इस पर नाराजगी व निराशा जताई है।

सहीराम के दोहते सोमप्रकाश बिश्नोई ने कहा कि नाना की अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ होनी ही चाहिए थी। दूसरी तरफ अब बिश्नोई समाज की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने स्व. सही राम को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान देने की घोषणा की है।

कल (29 मई) उनके शोक सभा कार्यक्रम में परिवार को ये सम्मान देगी। इससे पहले हरियाणा में पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल, उनके बेटे पूर्व MP कुलदीप बिश्नोई और राजस्थान के पूर्व डीजीपी भागीरथ बिश्नोई को ही ये सम्मान मिला है। सहीराम अब सम्मान पाने वाले चौथे व्यक्ति होंगे। यह पहला मामला है जब मरणोपरांत यह सम्मान दिया जा रहा है।

22 मई को सिरसा जिले के सकत्ता खेड़ा गांव में 104 साल की उम्र में सहीराम बिश्नोई का निधन हो गया था। सहीराम वर्ष 1957 में अबोहर विधानसभा से जनसंघ से विधायक बने थे।

वे बिश्नोई समाज से विधायक बनने वाले पहले व्यक्ति थे। इसके अलावा, लगातार 40 साल तक अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष भी रहे। 104 साल की उम्र में भी बिना चश्मा लगाए अखबार पढ़ लेते थे।

अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा (रजि.) मुक्तिधाम मुकाम ने बुधवार को एक लेटर जारी किया, जिसमें लिखा- संयुक्त पंजाब के अबोहर से पूर्व विधायक रहे सहीराम बिश्नोई को मरणोपरांत बिश्नोई रत्न से उनके पैतृक गांव डबवाली के सकताखेड़ा में सम्मानित किया जाएगा। महासभा के पदाधिकारियों ने सभी मेंबर्स को ये लेटर भेजा है। इसमें विभिन्न राज्यों में मंत्री, विधायक और पूर्व विधायक को भी 29 मई को शोक सभा में पहुंचने के लिए निमंत्रण दिया है।

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