भारतीय महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण व्रत संबंधी त्यौहारों में हरियाली तीज भी अपना अलग महत्व रखता है। यह सावन के महीने में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है।
मान्यता के अनुसार पत्नी के इस व्रत को रखने से पति की आयु में वृद्धि होती है,इसके साथ ही कुंवारी लड़कियां भी मन वांछित वर पाने हेतु इस व्रत को धारण करती हैं।इस तीज को आमतौर पर श्रावणी तीज, कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष तीज का व्रत 31 जुलाई के दिन रखा गया है।

यह व्रत विशेषत: भगवान शिव और माता पार्वती को आस्था का केंद्र मानकर रखा जाता है। इसमें भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की जाती है। व्रत में पूजा विधान और मुहुर्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए आपको इस साल हरियाली तीज व्रत रखने का मुहुर्त ज़रूर जानना चाहिए।
हरियाली तीज का मुहूर्त:
इस बार तीज आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 31 जुलाई को सुबह 6 बजकर 32 मिनट से शुरू होगी। जो भी महिलाएं पूजा करना चाहती है वह 6 बजकर 32 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक पूजा कर सकती है। इसी के साथ ही प्रदोष काल में पूजा का मुहूर्त शाम के समय 6 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। हरियाली तीज के दिन महिलाएं अपना संपूर्ण साज श्रृंगार करती हैं व हाथों में मेहंदी लगाकर झूलों पर सावन का आनंद लेती है। अगर किसी महिला का यह पहला तीज व्रत है तो वह इसे ससुराल की जगह मायके में जाकर करती है।
पूजा विधि:
हरियाली तीज के दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करना है उसके बाद आप हरे वस्त्र धारण कर लीजिए और पूजन की तैयारी कीजिए।वहीं बहुत जगह अपने के बड़ों को हरे वस्त्र और हरे रंग की चूड़ियों के साथ श्रृंगार का सामान देने का भी रिवाज होता है। जो भी महिलाएं इस व्रत को रखती हैं उन्हें माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण करके ही व्रत का संकल्प लेना चाहिए। जिन महिलाओं ने किसी कारण व्रत नहीं रख पाया हो,वे केवल माता पार्वती और शिव पूजन कर ही कर लें तो उसका भी बड़ा महत्व होता है। व्रत के दौरान पूजा करने के लिए आपको काली मिट्टी लेकर भगवान शिव,पार्वती व उनके पुत्र समेत तीन प्रतिमाएं बनानी हैं। उनके लिए ज़रूरी पूजा सामग्री में केले का पत्ता, बेल पत्र, लाल वस्त्र व श्रंगार आदि रखा जाता है.महिलाएं अपने हाथों से पकवान आदि भी बनाकर अर्पित करती हैं। इसमें तीज की व्रत कथा भी सुनी जाती है।
