हिसार के श्रद्धालुओं से सालासर धाम मंदिर में मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक दिन पहले मंगलवार को जहां किसान सभा ने सुजानगढ़ में एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। वहीं अब पूरे विवाद को सुलझाने भजन गायक कन्हैया मित्तल सामने आए हैं।

मंगलवार शाम को उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर 15 मिनट इस टॉपिक पर चर्चा की। इसके बाद परिवार से फोन पर बात की। कन्हैया मित्तल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर परिवार से बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग शेयर की और लिखा कि “बालाजी महाराज के सभी बच्चे हैं और हम एक हैं।

बहुत-बहुत आभार हिसार के परिवार का जिन्होंने पुनः सालासर जाने के लिए हां भरी और सनातनियों की एकता की एक मिसाल कायम की। 10 अप्रैल को मैं और मेरा हिसार का परिवार एक साथ सालासर बालाजी के माथा टेकेंगे। वहीं आज बालाजी मार्केट एसोसिएशन ने भी हिसार में मसले पर बैठक बुलाकर आगामी कार्रवाई करने को मंथन की बात कही है। वहीं परिवार का कहना है कि उन्होंने अभी जाने का कोई फैसला नहीं लिया है।

वहीं मामले में हिसार में बालाजी मार्केट एसोसिएशन के दुकानदारों ने बैठक बुलाई है। जिस परिवार से मारपीट हुई है वह बालाजी मार्केट एसोसिएशन के प्रधान संजय मेहता हैं। राठी कॉलोनी के संजय मेहता ने दैनिक भास्कर एप को बताया कि कन्हैया मित्तल का उनके पास फोन आया था, मगर अभी तक परिवार जाने पर सहमत नहीं हुआ है। आज इसको लेकर मार्केट एसोसिएशन ने बैठक बुलाई है इसी में आगामी फैसला लिया जाएगा।

प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल ने 15 मिनट के लाइव में घटनाक्रम पर संतुलित बयान देते हुए पीड़ित परिवार के प्रति सहानुभूति जताई, लेकिन मंदिर व्यवस्था और पुजारी परिवार पर सवाल उठाने को गलत बताया। कन्हैया मित्तल के अनुसार हिसार का परिवार दर्शन करने गया था और जो कुछ उनके साथ हुआ, वह दुखद है। उन्होंने माना कि बाउंसरों के साथ विवाद हुआ और परिवार की पीड़ा समझी जा सकती है, लेकिन हमें उनके बयान पर विचार भी करना चाहिए कि जिसमें कहा कि हम सालासर धाम नहीं जाएंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक कन्हैया मित्तल ने सालासर धाम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का जिक्र करते हुए बताया कि यह धाम करीब 275 साल पुराना है और इसकी सेवा पुजारी परिवार पीढ़ियों से करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि संत मोहन दास जी महाराज की भक्ति के प्रभाव से ही यहां बालाजी की स्थापना हुई।मित्तल ने कहा कि आज करीब 400 परिवार इस धाम की व्यवस्था से जुड़े हैं और ऐसे में सभी पुजारियों को गुंडा कहना गलत है। अगर किसी बाउंसर ने गलत किया है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन पूरे पुजारी समाज को बदनाम करना ठीक नहीं है।

वीआईपी दर्शन के मुद्दे पर मित्तल के अनुसार यह व्यवस्था केवल सालासर में ही नहीं, बल्कि देश के कई प्रमुख मंदिरों में लागू है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों सिर्फ खाटू श्याम और सालासर को ही टारगेट किया जाता है। अंत में उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।मित्तल के अनुसार एक हाथ उन्होंने उठाया तो एक हाथ हमने भी उठाया, लेकिन बैठकर हर समस्या का हल निकल सकता है।

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