रोहतक, 23 अगस्त : उपायुक्त सतबीर सिंह ने आवारा पशुओं से हुई दुर्घटना के पीड़ित लोगों से सरकार की दयालु-2 योजना का लाभ उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि सड़कों पर घूम रहे पशुओं से होने वाली दुर्घटना में किसी भी नागरिक की मृत्यु या दिव्यांगता होने की स्थिति में दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालु-2) के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। दयालु-2 योजना पोर्टल का सरलीकरण भी किया गया है, ताकि पात्र परिवारों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सके।
सतबीर सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रदेश में दयालु-2 योजना पोर्टल का शुभारंभ किया जा चुका है। यह पोर्टल सरकार की पारदर्शी एवं सरल सेवा वितरण प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस डिजिटल पहल से पात्र परिवारों को योजना का लाभ अधिक तेजी और सटीकता के साथ उपलब्ध होगा। योजना के तहत स्वीकृत सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि दयालु योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता होने पर संबंधित परिवार को एक लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, चोट लगने की स्थिति में न्यूनतम 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए परिवार का परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है।
सतबीर सिंह ने पात्र नागरिकों का आह्वान किया कि वे आवश्यकता पडऩे पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर इस योजना का लाभ उठाएं। जिला प्रशासन पात्र परिवारों को समय पर सहायता प्रदान करने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है। उपायुक्त ने बताया कि मृत्यु, चोट अथवा दिव्यांगता की स्थिति में योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को घटना के दिन से लेकर 90 दिन के भीतर आवेदन करना होगा। परिवार पहचान पत्र धारक हरियाणा के निवासी को योजना का लाभ मिलेगा यदि उन्हें कुत्ते के काटने अथवा आवारा पशुओं जैसे गाय, बैल, सांड, गधा, कुत्ता, नीलगाय, भैंस आदि के कारण हुई दुर्घटना में मृत्यु/चोट/दिव्यांगता की स्थिति हुई है। इसमें जंगली एवं परित्यक्त पशु भी शामिल हैं।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा है कि सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार दयालु-2 योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज निर्धारित किए गए हैं। आवश्यक दस्तावेजों में मृत्यु के मामले में- मृत्यु प्रमाण पत्र, एफआईआर / डीडीआर की प्रति, जिसमें दर्शाया हो कि दुर्घटना आवारा पशु/जानवर/कुत्ते के काटने के कारण हुई है। दिव्यांगता की स्थिति में संबंधित जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी/चिकित्सा बोर्ड द्वारा विधिवत जारी किया दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा डिस्चार्ज सारांश, एफआईआर/डीडीआर की प्रति, जिसमें दर्शाया हो कि दुर्घटना आवारा पशु/जानवर/कुत्ते के काटने के कारण हुई है।
सतबीर सिंह ने बताया कि पशु के हमले/काटने से हुई दिव्यांगता को सिद्ध करने वाले साक्ष्य दस्तावेज/प्रमाण होने चाहिए। इसी प्रकार चोट की स्थिति में अस्पताल में किए गए उपचार से संबंधित दस्तावेजों की प्रति, पशु के हमले/काटने से हुई दिव्यांगता को सिद्ध करने वाले साक्ष्य दस्तावेज/प्रमाण होना जरूरी है। कुत्ते के हमले का प्रमाण, जिसमें घावों की तस्वीरें, फटे कपड़े व हमले से उत्पन्न अन्य चिह्नों के फोटो शामिल हों। एफआईआर / डीडीआर की प्रति, जिसमें दर्शाया गया हो कि दुर्घटना आवारा पशु/जानवर/कुत्ते के काटने से हुई है।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को घटना के दिन से लेकर 90 दिन के भीतर पोर्टल पर आवेदन करना होगा। पीपीपी आईडी नंबर दर्ज करें और गेट ओटीपी पर क्लिक करें। ओटीपी दर्ज करें और सबमिट ओटीपी पर क्लिक करें। इसके बाद, परिवार के सदस्यों को प्रदर्शित किया जाएगा, फिर लाभार्थी सभी आवश्यक व्यक्तिगत विवरण भरेगा और फॉर्म जमा करेगा।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने बताया कि मृत्यु/दिव्यांगता (70 प्रतिशत या अधिक) की स्थिति में आयु 0-12 वर्ष तक 1 लाख रुपये, आयु 12 से 18 तक 2 लाख रुपये, आयु 18 से 25 तक 3 लाख रुपये, आयु 25 से 45 तक 5 लाख रुपये तथा आयु 45 से अधिक 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। दयालु-2 योजना के तहत मामूली चोट की स्थिति में 10 हजार रुपये, कुत्ते के प्रत्येक दांत के निशान पर 10 हजार रुपये तथा घाव के प्रत्येक 0.2 सेमी. पर न्यूनतम 20 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-2996024 व 01262-257692 पर संपर्क किया जा सकता है।

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