प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के चूक के मामले में पंजाब के डीजीपी (कार्यवाहक) सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय पर गाज गिरी है। पंजाब सरकार ने शनिवार को उन्हें पद से मुक्त कर दिया है। उनके साथ फिरोजपुर के SSP हरमनदीप हंस को भी हटाया गया है। चट्टोपाध्याय की जगह आईपीएस अधिकारी वीरेश कुमार भावरा को पंजाब पुलिस का महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया गया है।

बता दें कि 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी भावरा तीन महीने के अंतराल में पंजाब के तीसरे डीजीपी बने हैं। उन्हें पदभार ग्रहण करने की तिथि से न्यूनतम दो वर्ष की अवधि के लिए पुलिस के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं फिरोजपुर SSP की कमान नरिंदर भार्गव के जिम्मे आई है।
इस संदर्भ में एक आदेश जारी कर पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने कहा है कि पैनल समिति ने पंजाब पुलिस के मुखिया के पद के लिए तीन अधिकारियों की सिफारिश की थी। इनमें- वीरेश कुमार भावरा, राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख दिनकर गुप्ता और आईपीएस अधिकारी प्रबोध कुमार का नाम शामिल था।
इस आदेश में यह भी जोड़ा गया है कि- “संघ लोक सेवा आयोग से प्राप्त पैनल के विचार पर, पंजाब के राज्यपाल वीरेश कुमार भवरा, आईपीएस को पुलिस महानिदेशक, पंजाब [पुलिस बल के प्रमुख] के रूप में नियुक्त करने की कृपा कर रहे हैं। उनका कार्यकाल भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 03.07.2018 के आदेशों के अनुसरण में पदभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष न्यूनतम अवधि के लिए होगा।”
IPS Viresh Kumar Bhawra has been appointed as the new DGP of Punjab on the consideration of the panel received from UPSC pic.twitter.com/mzdzEAPKdS
— ANI (@ANI) January 8, 2022
राज्य पुलिस बल के प्रमुख में बदलाव राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले किया गया है। सूत्रों ने कहा कि गोवा, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की चुनाव आयोग की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू होने से कुछ समय पहले, भवरा की नियुक्ति का आदेश शनिवार दोपहर को जारी किया गया था।
भावरा ने ऐसे समय में पदभार संभाला है जब पंजाब पुलिस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिरोजपुर यात्रा में हुई चूक के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के विरोध के कारण मार्ग अवरुद्ध करने के बाद बुधवार को पीएम का काफिला मोहा-फिरोजपुर हाईवे पर एक फ्लाईओवर पर 15 से 20 मिनट तक फंसा रहा। राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा “गंभीर चूक” की अलग-अलग जांच शुरू की गई है।
बता दें कि भावरा से पहले सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, ने 20 दिनों से भी कम समय के लिए पंजाब के अंतरिम डीजीपी की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके छोटे से कार्यकाल में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ प्राथमिकी और पीएम के काफिले की राह में रुकावट जैसी दो बड़ी घटनाएं घटीं।
