रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (PGIMS) में जून माह के दौरान करीब 160 डॉक्टरों के एक माह के अवकाश पर जाने के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। संस्थान में कार्यरत लगभग 320 डॉक्टरों में से आधे डॉक्टर ही वर्तमान में मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जिसके कारण ओपीडी में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

मरीज सुबह से शाम तक अपने नंबर का इंतजार करने को मजबूर हैं। पीजीआई में पहले से ही डॉक्टरों की कमी बनी हुई है और अब बड़ी संख्या में डॉक्टरों के अवकाश पर होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। यह स्थिति केवल जून माह तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जुलाई माह में भी बड़ी संख्या में डॉक्टर अवकाश पर रहेंगे।

हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान डॉक्टरों को 30 दिन तथा शीतकालीन अवकाश के दौरान 24 दिन की छुट्टी दी जाती है, ताकि उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। इसी प्रक्रिया के तहत संस्थान को वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन करना पड़ता है।

डॉक्टरों की अनुपस्थिति में अनुबंध आधार पर नियुक्त फैकल्टी सदस्यों पर कार्यभार बढ़ गया है और उन्हें कई बार दोहरी शिफ्ट में कार्य करना पड़ रहा है। वहीं सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अवकाश पर गए चिकित्सक भी आवश्यकता पड़ने पर सीनियर रेजिडेंट्स के संपर्क में बने रहते हैं।

पीजीआई में मेडिकल टीचर्स के 445 स्वीकृत पदों में से 145 पद खाली हैं। इसके अलावा सीनियर प्रोफेसरों के 27 पद तथा रेजिडेंट डॉक्टरों के 186 पद भी रिक्त हैं। वर्तमान में संस्थान में केवल 40 अनुबंधित डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। प्रशासन की ओर से समय-समय पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे जाते हैं, लेकिन डॉक्टरों का रुझान सरकारी संस्थानों की अपेक्षा निजी अस्पतालों की ओर अधिक देखने को मिल रहा है। संस्थान प्रशासन का कहना है कि मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से जारी रह सकें।

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