हरियाणा की राजनीति में कुलदीप बिश्नोई को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बावजूद बिश्नोई परिवार की ओर से पार्टी को कोई सार्वजनिक बधाई नहीं दी गई। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में उनके भाजपा से नाराज होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

पूर्व विधायक भव्य बिश्नोई, जो हरियाणा भाजपा के युवा प्रभारी भी हैं, उन्होंने भी पार्टी को सीधे तौर पर जीत की बधाई नहीं दी। हालांकि उन्होंने असम की खुमटाई, गुवाहाटी सेंट्रल और सादिया सीट पर प्रचार किया था और वहां भाजपा प्रत्याशियों की जीत हुई, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्होंने केवल उम्मीदवारों को बधाई दी, पार्टी का नाम नहीं लिया।

बताया जा रहा है कि कुलदीप बिश्नोई अगले सप्ताह अमेरिका से लौट सकते हैं। उनके निजी सचिव मोहित के अनुसार, 12 मई तक वापसी के बाद वे समर्थकों की बैठक बुला सकते हैं। इससे पहले कांग्रेस छोड़ने से पहले भी उन्होंने समर्थकों से राय ली थी और बाद में भाजपा जॉइन की थी।

कुलदीप बिश्नोई के सामने 3 राजनीतिक विकल्प

  1. भाजपा में बने रहना
    कुलदीप बिश्नोई पार्टी नेतृत्व के सामने राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा के बयान का मुद्दा उठा सकते हैं। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली इसे निजी बयान बता चुके हैं।
  2. हजकां को दोबारा सक्रिय करना
    वे अपनी पुरानी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी होगी।
  3. कांग्रेस में वापसी
    तीसरा विकल्प कांग्रेस में वापसी का माना जा रहा है। उनके बड़े भाई चंद्रमोहन पहले से कांग्रेस में हैं और कुमारी सैलजा के करीबी माने जाते हैं।

रेखा शर्मा के बयान से बढ़ा विवाद

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब रेखा शर्मा ने पंचकूला में एक जनसभा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल और उनके बेटे चंद्रमोहन को लेकर टिप्पणी की थी। बयान का वीडियो सामने आने के बाद चंद्रमोहन ने उन्हें लीगल नोटिस भेजा था।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका से लौटने के बाद कुलदीप बिश्नोई क्या राजनीतिक फैसला लेते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!