हरियाणा के बहादुरगढ़ में नाबालिग युवक को बंधक बनाकर मजदूरी कराने और हादसे में हाथ कट जाने के बाद उसे लावारिस हालत में छोड़ देने के मामले पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने इस मामले में राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की जांच को अधूरी बताते हुए फटकार लगाई है और संबंधित अधिकारियों से 27 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी अनुसार, बिहार के किशनगंज जिले का संतोष रोजगार के झूठे प्रलोभन में फंसाकर बंधुआ मजदूरी के लिए हरियाणा लाया गया था। बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने साथियों से बिछड़ने के बाद एक व्यक्ति के संपर्क में आया। उसने मासिक वेतन पर डेयरी में काम का लालच दिया गया । परंतु उसे दो माह तक जबरन मजदूरी करवाई गई और शारीरिक उत्पीड़न भी सहना पड़ा। चारा काटते समय उसका बायां हाथ कट गया। इसके बाद उसे उसके हाल पर छोड़ दिया गया।
पुलिस रिपोर्ट में घटना स्थल का सटीक उल्लेख नहीं किया गया है, न ही यह स्पष्ट किया गया है कि पीड़ित बालक संतोष का बायां हाथ कहां और कैसे काटा गया। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग ने चिंता व्यक्त की है कि पुलिस रिपोर्ट में अब तक आरोपियों की पहचान, उनका पता लगाने या गिरफ्तारी संबंधी कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई गई है।
संतोष घायल अवस्था में किसी तरह नूंह पहुंचा, जहां एक शिक्षक ने उसकी मदद की, चिकित्सा सहायता दिलाई और पुलिस को सूचना दी। तब आयोग ने कहा था कि यह घटना न केवल संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन को दर्शाती है, बल्कि यह भी उजागर करती है कि बच्चों की सुरक्षा हेतु बनाए गए संस्थागत तंत्र में गंभीर कमी है।
आयोग का मानना है कि अब तक की जांच अपूर्ण, अस्पष्ट है। आयोग ने पाया कि पुलिस रिपोर्ट में घटनास्थल का सटीक विवरण, आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रगति का अभाव है।
झज्जर पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक, नूंह, सहायक श्रम आयुक्त जींद, डीसी जींद, उपायुक्त नूंह, सिविल सर्जन नूंह तथा बाल संरक्षण अधिकारी, नूंह को सुनवाई की अगली तिथि 27 नवंबर से पहले आयोग के सामने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आयुक्त पुलिस, झज्जर को निर्देशित किया गया है कि वे उप पुलिस आयुक्त, बल्लभगढ़ को नामित कर पुलिस अधीक्षक, रेलवे, अंबाला छावनी को आवश्यक सहयोग प्रदान करें, क्योंकि घटना की शुरुआत बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन (झज्जर) से हुई थी।
