दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के रेस्तरां और पबों में हर्बल हुक्का के इस्तेमाल की अनुमति देते हुए कहा कि आजीविका की कीमत पर कोविड प्रतिबंधों को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ‘हर्बल हुक्का’ जैविक जड़ी बूटियों से बने होते हैं और उसमें तंबाकू नहीं होता। कई रेस्तरां और बार द्वारा हर्बल स्वाद वाले हुक्का की बिक्री या सेवा पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई कर रही जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि महामारी के कारण लगाए गए प्रतिबंध हमेशा के लिए नहीं चल सकते।

उन्होंने कहा कि यह भी उल्लेख किया कि अधिकारियों द्वारा पहले से ही सिनेमा हॉल और स्विमिंग पूल को पूरी क्षमता से काम करने की अनुमति दी गई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल अंतरिम राहत प्रदान कर रहा है और इसके लिए याचिकाकर्ताओं को एक हलफनामा देना होगा कि वे ‘हर्बल हुक्कों’ की बिक्री करते समय कोविड के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करेंगे। इस मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी 2022 को होगी।

जस्टिस पल्ली ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के हलफनामा करने पर, मामले की अगली सुनवाई तक प्रतिवादी (दिल्ली सरकार) हर्बल हुक्कों की बिक्री पर कोई पाबंदी नहीं लगाएगा। हालांकि कोविड-19 के मामले बढ़ने पर दिल्ली सरकार अदालत जा सकती है। अदालत ने दिल्ली सरकार को याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अगर अन्य रेस्तरां और बार कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन में हर्बल हुक्का परोसने की अनुमति के लिए उससे संपर्क करते हैं तो इस पर खुद निर्णय लें।

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