हरियाणा में झज्जर की रहने वाली शूटर मनु भाकर ने 22 साल की उम्र में इतिहास रच दिया है। मंगलवार को उन्होंने पेरिस ओलिंपिक में दूसरा ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। यह जीत टीम इवेंट में मिली। 10 मीटर शूटिंग के इस मुकाबले में उनके साथ हरियाणा के ही अंबाला के रहने वाले शूटर सरबजोत सिंह थे। इससे पहले 10 मीटर शूटिंग के सिंगल इवेंट में मनु ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। दूसरे मेडल जीत के बाद मनु भाकर भारत की इकलौती खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने एक ओलिंपिक में 2 मेडल जीते हैं।
मनु-सरबजोत की जोड़ी की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा के CM नायब सैनी, सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत खेल व राजनीति जगत के दिग्गजों ने बधाई दी। मनु के पिता रामकिशन भाकर ने कहा- ”पूरे देशवासियों के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी है। उनके प्यार और आशीर्वाद के लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। उन्होंने टफ टाइम में साथ दिया। कल मैच से पहले बात हुई तो गोल्ड न जीतने से मनु थोड़ी निराश जरूर दिखी। मुझसे ज्यादा मां ने मनु पर मेहनत की।” सरबजोत के पिता जतिंदर सिंह ने कहा-” मैं बहुत खुश हूं। हमने यह मैच नहीं देखा। उन्होंने मेडल जीतने पर सबको बधाई दी।”
एक वक्त ऐसा था, जब मनु भाकर शूटिंग छोड़ना चाहती थी। 2021 के टोक्यो ओलिंपिक में मनु क्वालिफाइंग राउंड में थीं। मनु को 55 मिनट में 44 शॉट लेने थे। तभी उनकी पिस्टल खराब हो गई। 20 मिनट तक वे निशाना नहीं लगा पाईं। पिस्टल ठीक हुई, तब भी मनु सिर्फ 14 शॉट लगा पाईं और फाइनल की रेस से बाहर हो गईं। इसके बाद मनु ने शूटिंग छोड़ने का इरादा कर लिया। तब उनके पिता रामकिशन भाकर और मां सुमेधा भाकर ने उसे मोटीवेट किया।
सरबजोत सिंह अंबाला में मुलाना के धीन गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता जतिंदर सिंह किसान हैं। मां हरदीप कौर गृहिणी हैं। सरबजोत चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित DAV कॉलेज के छात्र हैं। सरबजोत ने स्कूल टाइम में ही शूटिंग करना शुरू कर दिया था। सरबजोत के पिता जतिंदर सिंह ने कहा कि पहले वे गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकेंगे। उसके बाद गांव में जश्न मनाएंगे।
