
हरियाणा के यमुनानगर में स्थित एक राम मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ के दौरान विवाद हो गया। आरोप है कि कुछ लोग हथियार लेकर मंदिर में घुस आए और वहां मौजूद एक अधिवक्ता (एडवोकेट) व उनके साथियों के साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने पिस्टल दिखाकर धमकाया और मंदिर में स्थापित मूर्तियों को बाहर फेंकने की धमकी भी दी।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता और उनके साथियों को कुछ समय तक मंदिर से बाहर नहीं निकलने दिया गया तथा मारपीट के दौरान उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग आपस में हाथापाई करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ महिलाएं भी नजर आ रही हैं।
इस मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता एवं अधिवक्ता चक्षु जुनेजा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह जगाधरी की श्रीनगर कॉलोनी के निवासी हैं। उनके अनुसार, उनके दादा ने वर्ष 1961 में गुरुनानकपुरा स्थित श्री राम मंदिर का निर्माण कराया था। दादा के निधन के बाद मंदिर की देखरेख उनके पिता पवन कुमार जुनेजा ने की। इसके बाद उनकी बुआ शारदा ने यह जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी वह स्वयं निभा रहे हैं।
शिकायत में अधिवक्ता चक्षु जुनेजा ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र, पुनीत, राजिंद्र सिक्का और एक अज्ञात पिस्टलधारी सहित कुछ लोग पिछले कुछ समय से मंदिर के संचालन और धार्मिक गतिविधियों में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ये लोग मंदिर के कार्यों में बाधा डालते हैं और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास करते हैं।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता चक्षु जुनेजा के अनुसार, जून महीने में मंदिर में नई मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई थी। साथ ही शनिदेव को समर्पित अखंड ज्योत भी प्रज्वलित की गई थी। उनका आरोप है कि इसी के बाद से कुछ लोग उनसे रंजिश रखने लगे।
शिकायत के मुताबिक, मंगलवार शाम करीब 7:15 बजे वह अपने साथियों अजय कुमार, संदीप कुमार, विनय शर्मा और मंदिर के पुजारी के साथ श्री राम मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचे और कुछ देर बाद विवाद शुरू हो गया।
अधिवक्ता का आरोप है कि नरेंद्र ने उन पर हमला कर गला दबाने का प्रयास किया। वहीं अन्य आरोपियों ने उनके साथ हाथापाई की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि एक व्यक्ति पिस्टल लेकर आया और जान से मारने की धमकी देते हुए कहा, “तुझे यहीं गाड़ देंगे।” आरोप है कि मारपीट के दौरान उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता चक्षु जुनेजा ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान आरोपियों ने उन्हें मंदिर से बाहर नहीं निकलने दिया और कुछ समय तक बंधक बनाकर रखा। शिकायत के अनुसार, इस दौरान उन्हें गोली मारने की धमकी भी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने मंदिर में स्थापित मूर्तियों को बाहर फेंकने की धमकी दी। हालांकि, मंदिर में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव कर उन्हें आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया और मूर्तियों को किसी भी नुकसान से बचा लिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया, जिसे बाद में मंदिर परिसर के बाहर फेंक दिया गया। इसके अलावा, अधिवक्ता का आरोप है कि उन्हें मोहल्ले की महिलाओं के माध्यम से झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी गई। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है। नरेंद्र शर्मा ने कहा कि इस मंदिर का निर्माण सभी श्रद्धालुओं ने आपस में मिलकर करवाया है, लेकिन एडवोकेट चक्षु जुनेजा इसे कबजाना चाहता है। एडवोकेट की ओर से मंदिर परिसर में नियमों से संबंधित एक नोटिस लगाकर उसके नीचे आदेशानुसार चक्षु जुनेजा लिखा, जिसका कॉलोनिवासियों ने विरोध किया।
नरेंद्र का कहना है कि इस बारे में बात करने के लिए जब चक्षु जुनेजा को बुलाया गया, तो उन्होंने मौके पर आकर गालियां निकालीं। राजेंद्र सिक्का ने बताया कि चक्षु जुनेजा मंदिर को अपने बुजुर्गों की जगह बताते हुए कहते हैं कि इसके हॉल की चाबी वह रखेंगे। वे चक्षु जुनेजा से मंदिर के कागजात कई बार मांग चुके हैं, लेकिन वह आज तक प्रस्तुत नहीं कर पाए।
सेक्टर-17 थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर चार नामजद आरोपियों और एक अज्ञात हथियारबंद व्यक्ति के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह विवाद मंदिर की देखरेख (केयरटेकिंग) और प्रबंधन को लेकर सामने आया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। दोनों पक्षों को अपने-अपने दस्तावेज और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

