रोहतक, 27 जुलाई। आज विश्व काला पीलिया दिवस है और इस बार की थीम है आओ इसे खत्म करें। इसी सोच के साथ पीजीआईएमएस रोहतक के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने फिर बता दिया कि काला पीलिया मौत नहीं है, समय पर पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह हराया जा सकता है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग अध्यक्ष सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि पीजीआईएमएस का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग हरियाणा का एकमात्र मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर है जिसे नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है। आज यह देश में सबसे ज्यादा काला पीलिया के मरीजों का इलाज करने वाला केंद्र बन चुका है। रोज करीब 80 से 100 मरीज यहां आते हैं, इनमें 15 से 20 नए मरीज होते हैं और करीब 60 से 70 पुराने मरीज फॉलोअप के लिए आते हैं। अब तक लगभग 39 हजार मरीज यहां अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।
डॉ. मल्होत्रा गर्व से कहते हैं कि यह भारत का पहला विभाग है जहां काला पीलिया का इलाज रोजाना और बिल्कुल निशुल्क होता है वो भी बिना किसी वेटिंग के। यहाँ टेस्ट, दवाइयां, एंडोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन, भर्ती की सुविधा सब कुछ एक ही छत के नीचे हरियाणा सरकार और कुलपति डॉ एच के अग्रवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए 20 लोगों की पूरी टीम काम करती है। उन्होंने बताया कि अब तक यहां करीब 38 हजार एंडोस्कोपी और 49 हजार फाइब्रोस्कैन मुफ्त में किए जा चुके हैं। इससे गरीब मरीजों के लाखों रुपये बचे हैं। यहां इलाज के लिए सिर्फ हरियाणा से ही नहीं, देश के कई राज्यों से लोग आते हैं।
डॉ प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इस विभाग ने दुनिया में पहली बार हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित गर्भवती माँ से उसके बच्चे में संक्रमण जाने को पूरी तरह रोक दिया है। अब तक 609 बच्चों को इस खतरनाक संक्रमण से बचाया जा चुका है। इस काम में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. वाणी मल्होत्रा का बहुत बड़ा योगदान है, जो इस प्रोग्राम की नोडल ऑफिसर भी हैं।
डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि हमने सिर्फ मरीज का ही इलाज नहीं किया, बल्कि उसके पूरे परिवार को सुरक्षित किया। काला पीलिया के मरीजों के लाखों परिवार वालों की जांच हुई। जिनमें संक्रमण नहीं था उन्हें हेपेटाइटिस-बी से बचाव की मुफ्त वैक्सीन दी गई। करीब 12 प्रतिशत लोग पीड़ित मिले, उनका तुरंत इलाज शुरू करके उन्हें नया जीवन दिया गया।
देश में पहली बार हाई रिस्क ग्रुप को मुफ्त हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन लगाने की शुरुआत भी यहीं से हुई। अब तक करीब 4 हजार आम लोगों और 3 हजार हेल्थ केयर वर्कर्स को वैक्सीन लग चुकी है। डॉ प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि बार्बर और ब्यूटी पार्लर वालों के लिए भी देश का पहला ट्रेनिंग प्रोग्राम यहीं चला, जिसके तहत 100 से ज्यादा सुरक्षा किट बाँटे गए और वैक्सीन लगाई गई। हर महीने रक्तदान करने आए करीब 80 लोगों में काला पीलिया पाया जाता है तो उन्हें भी तुरंत इलाज शुरू करके ठीक किया जाता है।
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि काला पीलिया से बचना है तो सबसे पहले नशे से दूर रहें, झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें, इलाज हमेशा प्रशिक्षित डॉक्टर से ही करवाएं और हर बार नई सिरिंज का इस्तेमाल सुनिश्चित करें। हर गर्भवती महिला को भी अपनी काला पीलिया की जांच जरूर करवानी चाहिए और डिलीवरी अस्पताल में ही करवानी चाहिए। अगर घर में किसी एक को काला पीलिया है तो परिवार के सभी लोगों का टेस्ट करवाना जरूरी है। टैटू बनवाना है तो किसी अच्छे सेंटर पर ही बनवाए ओर शेव करवानी हो तो भी नए ब्लेड से ही करवाएं।
डॉ मल्होत्रा ने कहा कि जो मरीज अभी प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज करवा रहे हैं, वे भी किसी भी दिन पीजीआईएमएस रोहतक आकर यहां मुफ्त इलाज का फायदा ले सकते हैं। काला पीलिया का मुफ्त इलाज अब हरियाणा के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पतालों में भी उपलब्ध है।
डॉ. मल्होत्रा ने इस पूरी उपलब्धि का श्रेय कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और निदेशक डॉ एस के सिंघल को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन की वजह से ही आज यह विभाग प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों के मरीजों का भी नई तकनीक से सफल इलाज कर पा रहा है। डॉ अग्रवाल ने कहा कि संस्थान में गैस्ट्रो से संबंधित बीमारियों के इलाज की संपूर्ण सुविधा उपलब्ध है।
जनसंपर्क विभाग के सीनियर प्रोफेसर इंचार्ज डॉ मंजूनाथ बी सी ने बताया कि कुलपति डॉ एच के अग्रवाल का हमेशा प्रयास रहता है कि संस्थान में आने वाले मरीजों को तत्परता से इलाज मिले और गैस्ट्रो विभाग इसी कार्य में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदान कर रहा है।


