1. रूस और युक्रेन के साथ भारत के संबंध गहरे है और दोनों ही देश भारत के साथ व्यापार में अहम है।
  2. रूस जो कि भारत का सबसे बड़ा हथियार और तकनीक निर्यातक देश है तो वही युक्रेन से आने वाले खाद्य तेल, यूरिया की भारत में काफी मांग है।
  3. एक ओर जहां रूस भारत का कूटनीतिक साझेदार है और भारत की सुरक्षा के लिए सदैव प्रतिबध्द है तो वही युक्रेन भारतीय छात्रों के लिए विदेश मे शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र है।
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रूस युक्रेन विवाद में चीन की भूमिका भारत के लिए काफ़ी नुक्सानजनक हो सकती है। रूस के व्यस्त होने का फायदा चीन भारत और ताईवान के खिलाफ उठा सकता है। रूस युक्रेन विवाद में भारत का पक्ष भी काफी अहम है और रूस युक्रेन युरोपीय यूनियन तथा नाटो हर कोई भारत जैसे शक्तिशाली देश को अपने पक्ष में रखना चाहते हैं।

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ऐसे में रूस युक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका अहम हो जाती है और वह भी तब जब युक्रेन के राजनयिक द्वारा स्वयं भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को रूस के साथ बातचीत कर युद्ध विराम करने की अपील की गई है। रूस युक्रेन युद्ध के कारण भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या है युक्रेन में पढ रहे भारतीय छात्र जिनकी संख्या 20000 से अधिक बताई जा रही है और जिन्हें समय रहते भारत वापस लाने में सरकार पूर्ण रूप से विफल रही है। अब ऐसे में इन छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत सरकार की है जिसके लिए सरकार प्रतिबध्द है। परंतु ऐसे में सरकार और खुफिया एजेंसियों की विफलता की समीक्षा होना भी जरूरी है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि आज से पहले सरकार चुनाव में व्यस्त थी शायद इसलिये भी युक्रेन मुद्दे पर ध्यान न गया हो। देखते हैं इस रूस युक्रेन विवाद भारत की प्रतिक्रिया क्या निकलती हैं, सही मायनों में यह भारत की कूटनीति और विदेश नीति की असल परीक्षा है।

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