रोहतक, 14 अक्टूबर। उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सतबीर सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने अथवा मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले फॉर्म-7 आवेदनों की संख्या निर्धारित की गई है। आयोग द्वारा जारी निर्देशों का उद्देश्य बिना ठोस आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना तथा मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है।
जिला निर्वाचन अधिकारी सतबीर सिंह ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार, दावे एवं आपत्तियों की अवधि के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। वहीं, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन (कंटीन्यूज अपडेशन) की अवधि के दौरान एक मतदाता द्वारा प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत किए जा सकेंगे। यह सीमा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होगी।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार, फॉर्म-7 आवेदन केवल वही व्यक्ति प्रस्तुत कर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। आवेदन में सभी आवश्यक विवरण भरना तथा निर्धारित स्थान पर आपत्तिकर्ता के स्वयं हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। हस्ताक्षर की मुहर को मूल हस्ताक्षर का विकल्प नहीं माना जाएगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी सतबीर सिंह ने बताया कि निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ) को फॉर्म-7 आवेदनों की जांच के दौरान आवेदक की वास्तविकता तथा मतदाता सूची में उपलब्ध विवरणों का सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक मामलों में आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत सत्यापन किया जाना चाहिए। दावे एवं आपत्तियों से संबंधित आवेदन, चाहे वे डाक के माध्यम से प्राप्त हुए हों या किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए हों, सामूहिक रूप से (बल्क में) स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने बताया कि नियमानुसार, जहां आवश्यक होगा, निर्वाचक पंजीयन अधिकारी आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत सुनवाई करेंगे तथा प्रत्येक फॉर्म-7 आवेदन के संबंध में आपत्ति की वैधता की जांच करेंगे। जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई गई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है तथा आवेदक ने जानबूझकर फॉर्म-7 में गलत बयान या घोषणा की है, तो उसके विरुद्ध जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
जिला निर्वाचन अधिकारी सतबीर सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इन निर्देशों की जानकारी संबंधित निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (एईआरओ) तथा अन्य क्षेत्रीय अधिकारियों तक पहुंचाने और इनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए प्रत्येक आपत्ति की नियमानुसार जांच और सत्यापन आवश्यक है, ताकि पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें तथा निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
