हरियाणवी लोक गायक एवं रागनी कलाकार विकास पासौरिया ने गौवंश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि एक समय था, जब गाय घरों का अभिन्न हिस्सा होती थी और गौवंश ग्रामीण जीवन व खेती का आधार था। आज खेती में मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल और आधुनिक जीवनशैली के कारण गौवंश की स्थिति बदल गई है। ऐसे में बेसहारा गौवंश की देखभाल के लिए हर गांव में गोशालाएं होनी चाहिए।
विकास पासौरिया बुधवार को भिवानी जिले के गांव कुसुंभी स्थित श्री श्याम गोशाला में आयोजित सत्संग एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आसपास के करीब 10 से 12 गांवों के लोग शामिल हुए।
आधुनिकता के दौर में गोशालाओं की जरूरत
विकास पासौरिया ने कहा कि पहले गाय घरों में रहती थी और खेती में भी गौवंश की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। अब मशीनों से खेती होने के कारण गौवंश की उपयोगिता को लेकर लोगों का नजरिया बदल रहा है। उन्होंने कहा कि गोशालाएं गौवंश को आश्रय देने और उनकी बेहतर देखभाल करने का माध्यम हैं। इसलिए हर गांव में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कोई भी गौवंश बेसहारा न रहे।
रागनी के जरिए मिलती है जीवन जीने की सीख
रागनी कलाकार ने कहा कि रागनी हमारी संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से गौसेवा, माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा जैसे संस्कारों की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने रागनी को केवल व्यापार तक सीमित कर इसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा, खानपान और पहनावे में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना जरूरी है।
नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा दादा लख्मीचंद का ज्ञान
विकास पासौरिया ने हरियाणवी सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित लख्मीचंद की रचनाओं में गहरा ज्ञान समाहित है, लेकिन उनकी भाषा और शब्दावली आज की नई पीढ़ी के लिए समझना थोड़ा कठिन हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस ज्ञान को सरल भाषा में युवाओं तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति को समझ सके और उससे जुड़ी रहे।
गोशाला में शेड निर्माण के लिए जुटी कमेटी
श्री श्याम गोशाला कुसुंभी के सचिव जितेंद्र भारद्वाज ने बताया कि गोशाला में हवन, सत्संग और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। गोशाला में पशुओं की सुविधा के लिए शेड का निर्माण करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए लोगों से सहयोग लिया जा रहा है। कमेटी की ओर से सरकार से आर्थिक सहायता लेने के लिए भी आवेदन किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गोशाला प्रधान खेमचंद शर्मा, उपप्रधान अजय उर्फ सोनू, राजस्थान गौरक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष राजू बुहाना, बीडीसी सदस्य रमेश कुमार सहित गोशाला कमेटी के सदस्य, गौ रक्षक और आसपास के गांवों के लोग मौजूद रहे।

