रोहतक में 20 मई की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (SITU) ने कमर कस ली है। सीटू के नेताओं ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होकर सरकार पर दबाव बनाने का निर्णय लिया है, ताकि मजदूर वर्ग की मांगों को पूरा करवाया जा सके। इसके बाद भी सरकार ने सीटू की मांग पूरी नहीं की तो दूसरे आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

सीटू की जिलाध्यक्ष कमलेश लाहली ने कहा कि लेबर कोड रद्द करने, 26000 रुपए न्यूनतम वेतन लागू करने, कच्चे कर्मचारियों, परियोजना कर्मचारियों को पक्का करने, निर्माण मजदूरों के बोर्ड को लागू करने, मनरेगा में 600 रुपए दिहाड़ी व 200 दिन काम देने, महंगाई व बेरोजगारी खत्म करने जैसे मुद्दों को लेकर हड़ताल में भाग लिया जाएगा।

सीटू के प्रांतीय उपाध्यक्ष सतबीर सिंह ने कहा कि भाजपा गठबंधन की नव उदारवादी नीतियों के चलते आज देश में महंगाई, बेरोजगारी बढ़ रही है। एनडीए सरकार अपने चहेते कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए देश के तमाम सार्वजनिक क्षेत्र को कौड़ियों के भाव लुटा रही हैं। लेबर कोड लागू करके मजदूरों को पूंजीपति घरानों का गुलाम बनाने का षडयंत्र रच रही हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में तमाम श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सीटू के जिला कोषाध्यक्ष धर्मवीर हुड्डा ने कहा कि 46वें श्रम सम्मेलन की रिपोर्ट को लागू नहीं किया जा रहा। लम्बे समय से काम करने वाली परियोजना कर्मचारियों व कच्चे कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा रहा और ना ही 26000 रुपए न्यूनतम वेतन लागू किया जा रहा। मनरेगा के बजट में हर साल भारी कटौतियां करके मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची जा रही हैं। जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

सीटू नेता विनोद ने बताया कि भाजपा नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संवैधानिक लोकतांत्रिक संस्थाओं पर टिप्पणियां करके उनको पंगु बनाने व दबाने का काम किया जा रहा हैं। ऐसे हालात में 20 मई को होने वाली देशव्यापी हड़ताल ऐतिहासिक होगी। जिसमें मजदूर, कर्मचारी, परियोजनाकर्मी व किसान भारी संख्या में शामिल होंगे।

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