किसान आंदोलन के कारण प्रदेश में करीब 11 माह से वाहन बिना टोल टैक्स भरे ही गुजर रहे थे। सोमवार को अचानक पानीपत जीटी रोड टोल और करनाल में बसताड़ा टोल के शुरू होने से वाहन चालक परेशान हो गए। बसताड़ा टोल को किसानों ने रिबन काटकर शुरू करवाया। एनएच-44 पर बसताड़ा टोल 353 दिनों से बंद था। बसताड़ा टोल पर पहले दिन 8 घंटे में 13 लाख रुपए टैक्स कलेक्शन हुआ।
यहां से एनएचएआई को प्रतिदिन 70 लाख रुपए टोल के रूप में आता था। पहले दिन व्यवस्था बिगड़ने से टोल पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। फास्टैग में बैलेंस खत्म होने और मंथली पास रिचार्ज न होने से नकद भुगतान को लेकर भी दिनभर विवाद होता रहा। बसताड़ा में सुबह से करीब दो किमी तक जाम लगा रहा, जो देर रात जारी रहा।
बहादुरगढ़ में टिकरी बाॅर्डर व सोनीपत में कुंडली बॉर्डर पर टोल 15 दिसंबर से खुल जाएंगे। रोहतक-पानीपत रोड स्थित मकड़ौली टोल 17 दिसंबर से शुरू हो सकता है। हालांकि, किसानों ने यहां पर एक पक्का ऑफिस बना दिया है। इधर, हुड्डा खाप ने टोल के 15 किमी के दायरे में आने वाले गांवों को टोल मुक्त रखने की मांग की है।
बसताड़ा टोल से रोजाना 30 से 35 हजार छोटे वाहन गुजरते हैं। वहीं, 8 से 10 हजार बड़े व भारी वाहनों की क्रॉसिंग होती है। सोमवार को टोल लेन में पहुंचे 50% वाहनों पर लगे फास्टैग में बैलेंस नहीं होने से बूम बैरियर नहीं उठा। आधे से अधिक वाहनों के मंथली पास रिचार्ज नहीं मिले। वहीं, झज्जर में डीघल टोल प्लाजा पर फास्टैग से बढ़े हुए रेट काटे गए, जबकि सीएम ने कहा था कि टोल के रेट नहीं बढ़ाए जाएंगे। डीघल टोल से पहले दिन लगभग 12 हजार वाहन निकले।
टोल बंद रहने से सरकार को 1280 करोड़ का नुकसान
किसान आंदोलन समाप्त हो चुका है। सड़कें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। पिछले करीब एक साल से बंद पड़े टोल से सरकार को 1280 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इनमें नेशनल हाईवे के टोल पर 1268 करोड़ रुपए और स्टेट हाईवे पर बने टोल पर 12 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। अब पीडब्ल्यूडी ने निर्देश दिए हैं कि जिन सड़कों पर किसान बैठे थे और जहां सड़कें टूटी हुई हैं, उन सड़कों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत की जाए या फिर सड़कों का नए सिरे से निर्माण किया जाए।
