हरियाणा के पूर्व विधायक धर्म सिंह छौक्कर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हजारों होमबायर्स के हितों को नजरअंदाज कर उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने छौक्कर को निर्देश दिया है कि वे महिरा होम्स-68, महिरा होम्स-103 और महिरा होम्स-104 परियोजनाओं से जुड़े खरीदारों को मुआवजा देने की ठोस योजना पेश करें।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान छौक्कर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंहवी से कहा कि गुरुवार तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताया जाए कि प्रभावित खरीदारों के दावों का निपटारा किस प्रकार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई है।

परिवार की संपत्तियों का भी देना होगा हिसाब

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत से आग्रह किया कि हलफनामे में धर्म सिंह छौक्कर, उनके बेटों और अन्य परिजनों की सभी चल-अचल संपत्तियों का पूरा विवरण भी शामिल किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि इन संपत्तियों पर कोई कर्ज या अन्य वित्तीय दायित्व है या नहीं।

खरीदारों की रकम के दुरुपयोग का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार माहिरा ग्रुप की किफायती आवासीय परियोजनाओं में हजारों लोगों से फ्लैट देने के नाम पर बड़ी रकम जुटाई गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस धन का उपयोग परियोजनाओं के निर्माण में करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया। ED का दावा है कि खरीदारों की रकम से करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं और करीब 616 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध बनाने का प्रयास किया गया।

हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है जमानत

इससे पहले अप्रैल 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट धर्म सिंह छौक्कर की नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के फरार होने की आशंका को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने यह भी माना था कि होमबायर्स से जुटाए गए धन के दुरुपयोग के आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और ट्रायल में हुई देरी का ठीकरा केवल जांच एजेंसियों पर नहीं फोड़ा जा सकता।

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