कुरुक्षेत्र | ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव धाम अरुणाय में सोमवार तड़के उस समय श्रद्धालु हैरान रह गए, जब मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पर एक काला नाग लिपटा हुआ मिला. पुजारी और सेवादार रोज की तरह सुबह आरती की तैयारी के लिए पहुंचे थे, तभी उन्हें कंबल के नीचे से फुंकारने की आवाज सुनाई दी. सावधानी से कंबल हटाने पर शिवलिंग पर काला नाग लिपटा हुआ दिखाई दिया. यह दृश्य देखते ही मंदिर परिसर में हलचल मच गई और सूचना तेजी से फैल गई.

थोड़ी ही देर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए. बताया जा रहा है कि करीब आधे घंटे तक नाग शिवलिंग पर ही लिपटा रहा और बाद में भीड़ बढ़ने के दौरान वहां से चला गया. इस दौरान श्रद्धालुओं में उत्सुकता और आस्था का माहौल बना रहा.

मंदिर के सेवादल मैनेजर भूषण गौतम ने बताया कि पुजारी पंडित गंगौत्री और सेवादार जैसे ही गर्भगृह खोलने पहुंचे, उन्हें पहले कंबल के नीचे से आवाज सुनाई दी. इसके बाद, जब कंबल हटाया गया तो शिवलिंग पर काला नाग दिखाई दिया. उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन, महंत विश्वनाथ गिरी और अन्य साधु- संतों को तुरंत सूचना दी गई. उनके अनुसार मंदिर परिसर में नाग पहले भी दिखाई देते रहे हैं लेकिन कई साल बाद शिवलिंग पर इस तरह का दृश्य देखने को मिला है. अब तक किसी श्रद्धालु को नुकसान नहीं हुआ है.

संगमेश्वर महादेव धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह स्थल प्राचीन समय से ही आस्था का केंद्र रहा है. कहा जाता है कि महात्मा गणेश गिरि को यहां झाड़ियों और दीमक के ढेर के बीच एक दिव्य शिवलिंग मिला था. बाद में भगवान शिव के निर्देश पर उसी स्थान पर मंदिर स्थापित किया गया. 1946 में महंत गिरधर नारायण पुरी और बाबा शरण पुरी के प्रयासों से वर्तमान मंदिर का निर्माण हुआ. धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय से पहले यहां शिवलिंग की पूजा की थी. इसी कारण इसे अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है. मान्यता है कि यहां कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए श्रद्धालु विशेष पूजा करते हैं.

मंदिर से जुड़ी कई लोकमान्यताएं भी प्रचलित हैं. श्रद्धालुओं के अनुसार यहां दूध से मक्खन नहीं निकलता और परिसर में चारपाई का उपयोग नहीं किया जाता. साथ ही लंबे समय से बीमार लोगों के लिए भंडारे में प्रसाद ग्रहण करना लाभकारी माना जाता है. मंदिर की व्यवस्थाएं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी द्वारा संचालित की जाती हैं. सावन माह के दौरान हर सोमवार को यहां विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें शिवलिंग को फल, फूल, अनाज और अन्य सामग्रियों से सजाया जाता है. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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