सनातन धर्म में शीतला सप्तमी व्रत रखा जाता रहा है ।। इस साल शीतला सप्तमी 24 मार्च, गुरुवार और शीतला अष्टमी का त्योहार 25 मार्च को मनाया जाएगा ।। इस त्योहार को बसौड़ा या बसोरा भी कहा जाता है ।। ऐसी मान्यता है कि इस दिन ठंडा भोजन करने से बीमारियां नहीं होती हैं ।। ऐसा कहा जाता है कि शीतला अष्टमी से ही ग्रीष्मकाल की शुरुआत होती है ।। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता की पूजा करने से चेचक, नेत्र विकार आदि रोग होने का भय नहीं रहता है ।। कहा जाता है कि शीतला माता की विधिवत पूजा करने वाली संतानहीन महिलाओं को आशीर्वाद प्राप्त होता है ।।

शीतला सप्तमी का महत्व :-

शीतला सप्तमी का व्रत करने से शीतला माता प्रसन्न होती हैं ।। इस व्रत की विशेषता है कि शीतला देवी को भोग लगाने वाले सभी भोजन को एक दिन पूर्व की बना लिया जाता है।। दूसरे दिन शीतला माता को भोग लगाया जाता है ।। इसलिए इस व्रत को बसोरा भी कहते हैं ।। मान्यता है कि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है।किसी गांव में एक महिला रहती थी ।। वह शीतला माता की भक्त थी तथा शीतला माता का व्रत करती थी ।। उसके गांव में और कोई भी शीतला माता की पूजा नहीं करता था।। एक दिन उस गांव में किसी कारण से आग लग गई ।। उस आग में गांव की सभी झोपड़ियां जल गई, लेकिन उस औरत की झोपड़ी सही-सलामत रही ।। सब लोगों ने उससे इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि मैं माता शीतला की पूजा करती हूं ।। इसलिए मेरा घर आग से सुरक्षित है ।। यह सुनकर गांव के अन्य लोग भी शीतला माता की पूजा करने लगे ।।

शीतला सप्तमी पूजन विधि :-

इस दिन लोग सूर्योदय से पहले उठकर ठंडे जल से स्नान करते हैं ।। इसके बाद शीतला माता के मंदिर में जाकर देवी को ठंडा जल अर्पित करके उनकी विधि-विधान से पूजा करते हैं ।। श्रीफल अर्पित करते हैं और एक दिन पूर्व पानी में भिगोई हुई चने की दाल चढ़ाते है ।। शीतला माता को ठंडे भोजन का नैवेद्य लगता है इसलिए भोजन एक दिन पहले रात में बनाकर रख लिया जाता है ।। शीतला सप्तमी की कथा सुनने के बाद घर आकर मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर हल्दी से हाथ के पांच पांच छापे लगाए जाते हैं ।। जो जल शीतला माता को अर्पित किया जाता है उसमें से थोड़ा सा बचाकर घर लाते हैं और उसे पूरे घर में छींट देते हैं ।। इससे शीतला माता की कृपा बनी रहती है और रोगों से घर की सुरक्षा होती है ।। शीतला सप्तमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है ।।

वासुदेव ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र
पं अनुराग शास्त्री
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