31 मार्च 2022, वीरवार को, दोपहर 12:21 से 1 अप्रैल 2022, शुक्रवार को 11:53 तक अमावस्या है ।।
विशेष :– पितृ कार्य(पिंड दान, पितृ तर्पण) 31 को शुभ रहेंगे, दान व स्नान 1 को शुभ रहेंगे ।।
पितृ दान :- हर अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद रसोई में भोजन बनाएं पहली थाली पितरों के लिए लगाए, जिसमें सब्जी, दही, खीर, 4 रोटी, 2 फल, दूध और दक्षिणा रखकर परिवार वालो के हाथ लगवाकर अपने ब्राह्मण के घर दे, प्रयत्न करें कि यह दान स्वयं दे कर आएं क्योंकि खुद के भोजन करने से पहले हमें अमावस्या का दान निकलना चाहिए ।।
घर में हर अमावस्या अथवा हर 15 दिन में पानी में समुंद्री नमक डालकर पोछा लगायें ।। इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी अथवा समुंद्री नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।।
अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है ।।
धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए ;-
हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें ।।
सामग्री :- 1. काले तिल, 2. जौं, 3. चावल, 4. गाय का घी, 5. चंदन पाऊडर, 6. गूगल, 7. गुड़, 8. देशी कर्पूर, गौ चंदन ।।
विधि :- गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त 8 वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की 1-1 आहुति दें ।।
आहुति मंत्र :-
- ॐ कुल देवताभ्यो नमः
- ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
- ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
- ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
- ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः ।।
– वासुदेव ज्योतिष अनुसंधान केंद्र
पं अनुराग शास्त्री
9812805055,9215705055
