रोहतक वार्ड नंबर-20 स्थित दशकों पुरानी बाग वाली गली को लेकर चल रहा विवाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। वार्ड-20 के पार्षद प्रवीण कौशिक ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने, गली को खुलवाने तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, वार्ड-20 में स्थित बाग वाली गली पिछले लगभग 50 वर्षों से क्षेत्रवासियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हजारों लोग प्रतिदिन इस रास्ते का उपयोग करते हैं और यह गली वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रही है। हाल ही में गली को लेकर विवाद सामने आया, जिसके बाद संबंधित पक्ष द्वारा गली को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

पार्षद प्रवीण कौशिक

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में भूमि स्वामी पक्ष का कहना है कि संबंधित जमीन को लेकर वर्षों से न्यायालय में मामला विचाराधीन था और उन्होंने अदालत से अपने पक्ष में फैसला प्राप्त किया है, जिसके बाद उन्हें उक्त भूमि का मालिकाना हक मिला है। भूमि स्वामी पक्ष का यह भी दावा है कि वर्ष 2011 में भी इस जमीन पर खेती की गई थी।वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासी एवं वार्ड-20 के पार्षद प्रवीण कौशिक का कहना है कि यह स्थान पिछले कई दशकों से सार्वजनिक गली के रूप में उपयोग में रहा है।

पार्षद का दावा है कि कम से कम वर्ष 1985 से लेकर आज तक यहां किसी प्रकार की खेती नहीं हुई और यह क्षेत्र लगातार लोगों की आवाजाही के लिए गली के रूप में प्रयुक्त होता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम द्वारा समय-समय पर यहां सड़क, सीवरेज, पानी निकासी, बिजली पोल एवं अन्य जनसुविधाओं से जुड़े कार्य भी किए गए हैं।

इस मामले को लेकर बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी पहले नगर निगम आयुक्त तथा जिला उपायुक्त से भी मिले थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें आश्वस्त किया गया था कि जनता की समस्या का समाधान किया जाएगा तथा गली को खुलवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लेकिन लोगों का आरोप है कि आश्वासन मिलने के बावजूद धरातल पर स्थिति इसके विपरीत देखने को मिली।स्थानीय निवासियों के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर समाधान की उम्मीद के बीच गली को बंद करने वाले पक्ष ने कार्य और तेज कर दिया तथा रास्ते में मिट्टी डलवाकर, भराव करवाकर और दीवार निर्माण कर गली को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई है और लोगों को अब लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।

गली बंद होने के बाद क्षेत्र में रोष बढ़ गया और स्थानीय निवासी सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने अपनी परेशानी जाहिर की। प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग की गर्मी के कारण तबीयत बिगड़ने की घटना भी सामने आई। लोगों का कहना है कि यह केवल एक गली का मामला नहीं बल्कि हजारों लोगों की दैनिक सुविधा और जनहित से जुड़ा विषय है।स्थानीय निवासियों द्वारा दोबारा गुहार लगाए जाने के बाद वार्ड-20 के पार्षद प्रवीण कौशिक ने पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में पार्षद ने उल्लेख किया है कि यह गली दशकों से सार्वजनिक उपयोग में रही है तथा नगर निगम के विभिन्न विभागों द्वारा यहां जनसुविधाओं से संबंधित अनेक कार्य किए गए हैं। उन्होंने मामले में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।पार्षद प्रवीण कौशिक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए, सभी रिकॉर्डों की समीक्षा की जाए, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए बाग वाली गली को शीघ्र खुलवाने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।

पार्षद ने कहा कि वे क्षेत्र की जनता के साथ खड़े हैं और वार्डवासियों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का कार्य लगातार करते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर उचित संज्ञान लेते हुए जल्द कार्रवाई करेंगे।ऐसे में अब पूरा मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। एक ओर भूमि स्वामी पक्ष अदालत के निर्णय और वर्ष 2011 में खेती होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासी, जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के लोग इसे दशकों पुराना सार्वजनिक रास्ता बताते हुए गली को पुनः खुलवाने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार, जिला प्रशासन और नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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